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 बीजेपी ने क्यों किए 10 दिन में बड़े बदलाव

बीजेपी ने क्यों किए 10 दिन में बड़े बदलाव



पूनिया को उपनेता बनाने के पीछे क्या है कहानी, राजे को मिल सकती है महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

जयपुर | राजस्थान में जातीय समीकरण कितना अहम है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बीजेपी ने 7 महीने से भी कम समय के लिए नया नेता प्रतिपक्ष और उप नेता प्रतिपक्ष बना दिया। उम्मीद के मुताबिक राजेंद्र राठौड़ नेता प्रतिपक्ष चुन लिए गए। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया को उपनेता प्रतिपक्ष बना दिया गया।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो दोनों नियुक्तियां संगठनात्मक कम और राजस्थान के जातीय गणित को साधने वाली ज्यादा लगती हैं। पिछले 10 दिन के भीतर बीजेपी ने 3 नई नियुक्तियां कर राजस्थान में अपनी सोशल इंजीनियरिंग पटरी पर लाने की कोशिश की है। साथ ही ये नियुक्तियां कई सियासी संकेत भी देती हैं।

 बीजेपी का 2023 के विधानसभा चुनाव को लेकर जातिगत रणनीति और तीन नियुक्तियों के बड़े सियासी संकेत..

पहला संकेत: बीजेपी ने अपने कोर वोटर को साधा

ब्राह्मण, वैश्य और क्षत्रिय, ये बीजेपी का कोर वोटर है। यही वजह है कि चुनाव से ठीक पहले अब बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग इसी दिशा में नजर आ रही है। एक ओर जहां सीपी जोशी को प्रदेशाध्यक्ष बनाकर बीजेपी ने ब्राह्मणों को साधने की कोशिश की है।

वहीं, दूसरी ओर राजेंद्र राठौड़ को चुनाव से ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष बनाकर राजपूतों को भी अपनी तरफ करने का प्रयास किया है। वहीं राजस्थान में ओम बिड़ला और गुलाबचंद कटारिया को अहम पद देकर बीजेपी ने वैश्यों को पहले ही साधा हुआ है। ओम बिड़ला जहां लोकसभा अध्यक्ष हैं, वहीं गुलाबचंद कटारिया को हाल ही में असम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

दूसरा संकेत: हाईकमान का फैसला ही अंतिम

बीजेपी ने पिछले कुछ समय के घटनाक्रमों से यह साफ संकेत दिया है कि जो हाईकमान चाहेगा, वही अंतिम फैसला होगा। बीजेपी हाईकमान किसी भी दबाव में आने वाला नहीं है। जाट जैसे बड़े वोट बैंक के बावजूद सतीश पूनिया को रिप्लेस कर बीजेपी ने यह साफ किया है। वहीं, सीपी जोशी की नियुक्ति भी इसी बात का संकेत है।

तीसरा संकेत: लोकसभा चुनाव के परिणामों पर नजर

बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता और राजनीतिक जानकार बताते हैं कि ये तमाम रणनीति विधानसभा चुनाव के साथ-साथ 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भी है।

बीजेपी की नजर लोकसभा चुनाव में राजस्थान के परफॉर्मेंस को बनाए रखने पर है। माना जा रहा है कि 2024 लोकसभा चुनाव में कुछ राज्यों में भाजपा को नुकसान हो सकता है। ऐसे में राजस्थान जैसे राज्यों से बीजेपी अपना जरा भी नुकसान नहीं करना चाहती है। यही वजह है कि वह लगातार हर वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है।


सरकार को घेरने वाले नेता को जिम्मेदारी मिली है: अरुण चतुर्वेदी

पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि पार्टी ने लंबे समय से पार्टी में प्रतिबद्ध और विधानसभा में सरकार को मजबूती से घेरने का काम कर रहे राजेंद्र राठौड़ को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी है। तमाम नई नियुक्तियों के साथ बीजेपी आगे भी सरकार को मजबूती से घेरने का काम करेगी।


बीजेपी की राजस्थान में सोशल इंजीनियरिंग अब कुछ इस तरह

जाट: राजस्थान में जाति के तौर पर जाट समाज का बड़ा प्रभाव है। यही वजह है कि बीजेपी ने वर्तमान में कई अहम पदों पर जाट नेताओं को काबिज किया हुआ है। प्रदेश अध्यक्ष के बाद सतीश पूनिया को उपनेता प्रतिपक्ष बनाया है। वहीं, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ इसी कौम से आते हैं और वे राजस्थान के रहने वाले हैं।


केंद्रीय मंत्री के रूप में कैलाश चैधरी राजस्थान में जाट समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हालांकि पूनिया को प्रदेशाध्यक्ष से हटाकर उपनेता प्रतिपक्ष बनाने का निर्णय बीजेपी के लिहाज से चुनाव में क्या असर डालेगा, यह देखने की बात होगी।

ब्राह्मण-वैश्य: ब्राह्मण समाज का भी राजस्थान में अच्छा प्रभाव है, इसीलिए सीपी जोशी को प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अतिरिक्त राजस्थान से घनश्याम तिवाड़ी ब्राह्मण चेहरे के रूप में राज्यसभा के सदस्य हैं। वहीं वैश्य के रूप में लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला और असम के राज्यपाल के रूप में गुलाबचंद कटारिया हैं।


राजपूत: जातिगत आधार पर राजपूत भी राजस्थान का बेहद अहम वोट बैंक है। यही वजह है बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियां इस वोट बैंक को साधे रखने की कोशिश करती हैं। इसी के चलते राजेंद्र राठौड़ को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है। उनके अलावा फिलहाल राजस्थान में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत राजस्थान से राजपूत चेहरे के रूप में हैं।


दलित: दलितों की संख्या भी राजस्थान में अच्छी है। इनमें मेघवाल समाज बड़ा है, इसीलिए अर्जुन मेघवाल के रूप में राजस्थान से केंद्रीय मंत्री हैं। हालांकि राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बीजेपी में दलितों का प्रतिनिधित्व फिलहाल राजस्थान में इतना बड़ा नहीं दिख रहा है। यही वजह है कि नेता प्रतिपक्ष के लिए कैलाश मेघवाल का नाम भी चर्चा में था।


आदिवासी: आदिवासी समुदाय में मीणा सबसे बड़ा वोट बैंक है। इसी के चलते डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को राजस्थान से राज्यसभा सांसद बनाया हुआ है। कुल मिलाकर 12 प्रतिशत वोट बैंक राजस्थान में आदिवासियों का है, मगर सांसद के अलावा इस समुदाय के पास फिलहाल कोई खास प्रतिनिधित्व बीजेपी में अब तक नहीं है।


अन्य: ओबीसी-माली के रूप में राजेंद्र गहलोत राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन मोटे तौर पर ये ही वो जातियां हैं, जो राजस्थान की राजनीति को प्रभावित करती हैं। इनके अलावा मुसलमान और गुर्जर ये दो बड़े वोट बैंक ही ऐसे हैं, जिनमें बीजेपी के पास न कोई बड़ा नेता मौजूद है, न ही बीजेपी ने इन्हें संगठन या सत्ता में कोई विशेष जगह दी है।

रिशफलिंग-फैक्टर: किरोड़ी को मंत्री बना आदिवासियों को साध सकते हैं

आने वाले समय में बीजेपी केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी फेरबदल करेगी। ऐसे में दो बड़े वोट बैंक को साधने के लिए राजस्थान से दो नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। इनमें सबसे प्रमुख नाम आदिवासी नेता डॉ. किरोड़ीलाल मीणा का है।


मीणा पीएम मोदी के करीबी रहे हैं और आदिवासी समाज में पकड़ रखते हैं। राजस्थान में फिलहाल किसी आदिवासी चेहरे के पास कोई अहम पद नहीं है।


पार्टी एकराय होकर आगे बढ़ेगी, तभी जीत होगी: प्रताप सिंघवी

पूर्व मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह सिंघवी कहते हैं कि पार्टी फिलहाल एक मत है। इसी तरह अगर एकराय होकर चुनाव लड़ेंगे तो ठीक रहेगा। भाजपा ने हमेशा हर समाज को मौका दिया है, आगे भी देगी। भविष्य में भी पार्टी एकराय होकर आगे बढ़ती है, तभी जीत मिलेगी


दीया कुमारी को मिल सकती है जगह

बीजेपी ने जातिगत गणित तो लगभग साध लिया है। मगर अब भी आधी आबादी को लेकर बीजेपी में कोई हलचल नहीं दिखती है। सत्ता और संगठन के बड़े पदों में से किसी पर भी कोई महिला चेहरा नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में राजसमंद सांसद व प्रदेश महामंत्री दीया कुमारी को अहम पद देकर बीजेपी इस बॉक्स को भी टिक कर सकती है।


माना जा रहा है कि दीया कुमारी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती हैं। वहीं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को भी कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। वसुंधरा राजे का राजस्थान में अच्छा-खासा प्रभाव है।

बड़े नेताओं में अब वसुंधरा ही बाकी

बीजेपी ने एक-एक कर तमाम बड़े नेताओं के बीच संतुलन साधते हुए उन्हें अलग-अलग पदों पर नियुक्त कर दिया है, वहीं कुछ नेताओं के लिए प्लान बनाया जा चुका है। ऐसे में प्रमुख नेताओं में अब सिर्फ वसुंधरा राजे ही हैं, जिन्हें लेकर बीजेपी सेंट्रल लीडरशिप कोई निर्णय नहीं ले पाई है।


जानकारों का मानना है कि वसुंधरा राजे फैक्टर विधानसभा चुनाव 2023 और लोकसभा चुनाव 2024 में अहम रहेगा। ऐसे में बीजेपी को उन्हें लेकर जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेना पड़ेगा। जल्द ही उनकी भूमिका भी तय हो जाएगी।

सीएम का चेहरा कौन होगा, ये अब भी सवाल

बीजेपी ने राजस्थान में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया है। इसके बावजूद अब भी इसे लेकर तस्वीर साफ नहीं हो पाई है कि बीजेपी में अगले विधानसभा चुनाव में सीएम का चेहरा कौन होगा। बीजेपी के कई नेता अब भी अलग-अलग दावे करते नजर आते हैं।


2022 में अमित शाह और जेपी नड्‌डा राजस्थान दौरे के दौरान ये सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि अगला चुनाव नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही लड़ा जाएगा। इसका मतलब है कि संभवतः चुनाव से पहले सीएम फेस का ऐलान नहीं किया जाएगा।


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