स्वर्वेद महामंदिर का बनना ईश्वरीय प्रेरणा का उदाहरण, वाराणसी में लोकार्पण के बाद बोले पीएम मोदी
वाराणसी में बन रहे दुनिया के सबसे बड़े ध्यान केंद्र स्वर्वेद महामंदिर धाम का पीएम मोदी ने सोमवार को लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने इसे ईश्वरीय प्रेरणा का उदाहरण बताया। मोदी पहले भी यहां आ चुके हैं।
पीएम मोदी ने सोमवार को वाराणसी दौरे के दूसरे दिन 'स्वर्वेद महामंदिर' का लोकार्पण करते हुए कहा कि सरकार, समाज और संतगण, सब साथ मिलकर काशी के कायाकल्प के लिए कार्य कर रहे हैं। आज स्वर्वेद मंदिर का बनकर तैयार होना ईश्वरीय प्रेरणा का उदाहरण है। 'स्वर्वेद महामंदिर' दुनिया का सबसे बड़ा ध्यान केंद्र है। इसे वाराणसी गाजीपुर मार्ग पर चौबेपुर के उमरहा में बनाया गया है। बीस सालों से इसका निर्माण हो रहा था। पीएम मोदी ने कहा कि ये महामंदिर, महर्षि सदाफल देव जी की शिक्षाओं, उनके उपदेशों का प्रतीक है। इस मंदिर की दिव्यता जितनी आकर्षित करती है, इसकी भव्यता हमें उतना ही अचंभित भी करती है। इसलिए मंदिर का भ्रमण करते हुए मैं खुद भी मंत्र-मुग्ध हो गया था।मोदी ने कहा कि स्वर्वेद महामंदिर भारत के सामाजिक और आध्यात्मिक सामर्थ्य का एक आधुनिक प्रतीक है। मैं देख रहा था, इसकी दीवारों पर स्वर्वेद के श्लोक बड़ी सुंदरता के साथ अंकित किये गये हैं। वेद, उपनिषद्, रामायण, गीता और महाभारत आदि ग्रन्थों के दिव्य सन्देश भी इसमें चित्रों के जरिये उकेरे गए हैं। इसलिए, ये मंदिर एक तरह से आध्यात्म, इतिहास और संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। यहां हजारों साधक एक साथ विहंगम योग साधना कर सकते हैं। इसलिए, ये महामंदिर एक योग तीर्थ भी है और साथ-साथ ये ज्ञानतीर्थ भी है।उन्होंने कहा कि मैं इस अद्भुत आध्यात्मिक निर्माण के लिए स्वर्वेद महामंदिर न्यास को और लाखों-लाख अनुयायियों को बधाई देता हूं। विशेष रूप से मैं पूज्य स्वामी श्री स्वतंत्र देव जी और पूज्य श्री विज्ञान देव जी का विशेष रूप से
उन्होंने कहा कि आपको याद होगा, दो वर्ष पहले इसी तरह हम अखिल भारतीय विहंगम योग संस्थान के वार्षिकोत्सव में एकत्रित हुये थे। एक बार फिर मुझे विहंगम योग संत समाज के शताब्दी समारोह के ऐतिहासिक कार्यक्रम में आने का अवसर मिला है।

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