4 दिन से नहीं मिल रहे स्टाम्प पेपर
वेंडर्स को बिक्री रजिस्टर नहीं मिलने से लोग परेशान; रेवेन्यू टिकट्स की भी किल्लत
जयपुर | राजस्थान में नया वित्तवर्ष शुरू होने के साथ ही स्टाम्प के लिए लोग परेशान होने लगे है। हाइकोर्ट, जिला कलेक्ट्रेट, मिनी सचिवालय समेत तमाम जगहों पर स्टाम्प वेंडर्स के पास से लोग बिना स्टाम्प पेपर लिए वापस लौट रहे है। इसके पीछे कारण स्टाम्प पेपर की कमी नहीं बल्कि मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग की लेटलतीफी है। वहीं इन दिनों रेवेन्यू टिकट की भी किल्लत बढ़ गई है।
दरअसल इस वित्तवर्ष के स्टॉक मेंटेन और बिक्री रजिस्टर अब तक स्टाम्प विक्रेताओं को विभाग ने उपलब्ध नहीं करवाए है। इन रजिस्टर में एंट्री करने के बाद ही स्टाम्प विक्रेता आमजन को स्टाम्प पेपर बेच सकते है। नया वित्त वर्ष 2023-24 शुरू हुए 4 दिन निकल गए, लेकिन अब तक विभाग ने रजिस्टर उपलब्ध नहीं करवाए है। लोग को अभी जो स्टाम्प पेपर मिल रहे है वह पुराने स्टॉक से कुछ चुनिंदा वेंडर्स से ही मिल रहे है। वहीं ज्यादातर लोग ई-स्टाम्प खरीद कर अपना काम चला रहा है।
दि डिस्टिक एडवोकेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विवेक शर्मा ने बताया कि सरकार की ओर से अब तक रजिस्टर उपलब्ध नहीं करवाए गए है, जिसके कारण स्टाम्प वेंडर्स प्रभावित है। इसके अलावा रेवेन्यू के एक, दो या 10 रुपए के टिकट की भी भारी समस्या चल रही है, जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहे है।
20 हजार से ज्यादा वेंडर्स है
राजस्थान में वर्तमान में स्टाम्प पेपर बेचने वाले 20 हजार से ज्यादा रजिस्टर्ड वेंडर्स है। इन वेंडर्स को हर साल स्टाम्प बेचने के लिए लाइसेंस फीस सरकार को देनी होती है। इसके बाद ही सरकार इनको स्टाम्प पेपर और उसकी बिक्री का रिकॉर्ड संधारित करने के लिए दो रजिस्टर उपलब्ध करवाती है। इसमें एक रजिस्टर में विक्रेता के नाम, पते की जानकारी होती है, जबकि दूसरे में स्टाम्प पेपर बेचने का डिटेल।
एप्लीकेशन का भी विरोध
इधर स्टाम्प वेंडर्स अब नए एप्लीकेशन का भी विरोध कर रहे है। सरकार ने स्टाम्प विक्रेता नाम से एक मोबाइल एप बनाया है, जिस पर सभी वेंडर्स को हर रोज अपने यहां बेचे गए स्टाम्प की डिटेल अपलोड करनी है। इसके पीछे मुख्य उदेश्य स्टाम्प बेचान में होने वाली गड़बड़ी को रोकना है। दरअसल कुछ स्टांप वेंडर्स विभाग द्वारा उपलब्ध स्टॉक रजिस्टर में खाली जगह छोड़ देते है और बैकडेट में स्टाम्प बेचकर उन खाली जगहों को भर देते है। कुछ वेंडर्स इन रजिस्टर को सरकार के यहां जमा करवाने में भी देरी करते हैं। ऑनलाइन स्टांप एप आने के बाद इस तरह की गड़बड़ी को रोका जा सकेगा।

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