निगम गौशाला में रोज दस से ज्यादा गौवंश की मौतः
गौवंश शिफिंटग का काम अटका, निजी गौशालाओं में करना था शिफ्ट
कोटा | कोटा नगर निगम की बंधा धर्मपुरा गौशाला में गौवंशों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा। रोज दस से ज्यादा गौवंशों की मौत हो रही है। इधर, क्षमता से ज्यादा गाय होने और रोज गायों की मौत के बाद उन्हें शिफ्ट करने का फैसला लिया गया लेकिन अब गौवंशों की शिफिं्टग नहीं हो पा रही है। सिर्फ सौ गौवंशों को ही अब तक शिफ्ट किया जा चुका है।
दरअसल पहले प्राइवेट गौ शालाओं के संचालक निगम की गौशाला से दुधारू और हष्ट-पुष्ट गाय ही लेना चाह रहे थे। बाद में सख्ती हुई तो केवल सौ गौवंशों को ही दूसरी गौशाला में भेजा जा सका। इसके पीछे कैटल वाहन की कमी सामने आई कि निगम के कैटल वाहन दो है और दोनों ही खराब थे। गौशाला समिति अध्यक्ष के अनुसार अब एक कैटल वाहन ठीक हुआ है सोमवार को आगे की प्रोसेस की जाएगी। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में गौवंश की अधिकता होने से वहां से 1400 पशुओं को जिले की अन्य गौशालाओं में शिफ्ट किया जाना है। जिला कलेक्टर ने इसके आदेश भी किए हैं। जिसमें जिले की सभी प्राइवेट गौशालाओं को 100-100 पशु देने को कहा है।
गौशाला समिति चेयरमैन जितेंद्र सिंह ने बताया कि गौशाला में वर्तमान में 42 सौ से अधिक गौवंश है। जिनमें से मात्र 20 से 25 ही दुधारू गाय हैं। नगर निगम की गौशाला में जितने पशु हैं उनमें से अधिकतर बीमार व कमजोर हैं। गौशाला में अधिकतर सड़कों से लावारिस हालत में ही पशुओं को पकड़कर बंद किया जा रहा है। शहर को कैटल फ्री बनाने के लिए नगर निगम व नगर विकास न्यास की ओर से लावारिस पशुओं को पकड़कर गौशाला में बंद किया जा रहा है।
साथ ही बाड़े बनाकर रहने वाले पशु पालकों को न्यास की देवनारायण आवासीय योजना में शिफ्ट किया जा रहा है। हालत यह है कि पिछले कई दिन से अभियान के रूप में इन पशुओं को पकड़ने से निगम की गौशाला में क्षमता से करीब दो गुना 44 सौ से अधिक गौवंश हो गए हैं।

0 Response to "निगम गौशाला में रोज दस से ज्यादा गौवंश की मौतः"
एक टिप्पणी भेजें