अमेरिका में अबॉर्शन पर फिर हंगामा
ट्रम्प के नियुक्त किए जज ने गर्भनिरोधक दवा पर रोक लगाई, दूसरे जज ने हटाई, आगे क्या होगा?
विदेश | अमेरिका के टेक्सास राज्य के एक जज ने गर्भ निरोधक दवा माइफप्रिस्टोन के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने का फैसला सुनाया है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक जिस जज मैथ्यू कासमारिक ने ये फैसला सुनाया है उसे पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नियुक्त किया था। इस फैसले से अमेरिका में एक बार फिर गर्भपात के अधिकार पर विवाद शुरू हो गया है।
जज ने गर्भनिरोधक दवाओं पर अपनी राय 67 पेजों में लिखकर दी है। इस फैसले से अमेरिका के जिन राज्यों में गर्भपात पर पाबंदी नहीं लगी थी, वहां की महिलाओं के लिए भी अबॉर्शन मुश्किल हो जाएगा। जज ने अमेरिका के फूड एंड ड्रग डिपार्टमेंट को इस फैसले के खिलाफ दूसरी कोर्ट में जाने के लिए 7 दिन का समय दिया है।
ओबामा के नियुक्त किए जज ने फैसला पलटा
एक तरफ जहां ट्रम्प के नियुक्त किए टेक्सास के फेडरेल जज ने गर्भपात के खिलाफ फैसला सुनाया है। वहीं, इसी फैसले को वॉशिंगटन में ओबामा के नियुक्त किए जज ने एक घंटे में पलट दिया। इन्होंने कहा कि अमेरिका के 17 राज्यों में पहले की तरह ही माइफप्रिस्टोन नाम की गर्भनिरोधक दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। दरअसल, अमेरिका में गर्भपात के लिए इस दवा का इस्तेमाल 20 सालों से जारी है। बीबीसी के मुताबिक दोनों जजों के फैसले परस्पर विरोधी होने के चलते मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचना तय है।
गर्भपात विरोधियों ने दायर की थी याचिका
दरअसल, गर्भपात विरोधी समूह ने टेक्सास में दायर याचिका में गर्भपात की दवा को हानिकारक बताया था। जिसके बाद जज कासमारिक ने कहा था कि अमेरिका के फूड और ड्रग विभाग ने सही जांच किए बिना इसके इस्तेमाल की मंजूरी दे दी थी।
उन्होंने यह भी कहा कि थ्क्। ने महिलाओं की मानसिक स्थिति पर होने वाले असर का भी ठीक से आंकलन नहीं किया । जबकि, थ्क्। ने 2020 में इस दवा को मंजूरी देने से पहले इस पर 4 साल लगा दिए।
’जज का फैसला राजनीति से प्रेरित’
अमेरिका की मेनस्ट्रीम मेडिकल संस्थाएं इस दवा के पूरी तरह से सेफ होने का दावा करती आ रही हैं। जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर एलीसन व्हेलन ने कहा कि जज ने फैसले में बार-बार फीटस (भ्रूण) शब्द की जगह पैदा नहीं हुआ इंसान शब्द का इस्तेमाल किया। ये भड़काने वाली बात है। इससे साफ होता है कि उनका फैसला राजनीति से प्रभावित है। वो उस दक्षिण पंथी लॉबी की भाषा बोल रहे हैं जो महिलाओं के गर्भपात के अधिकार के खिलाफ हैं।
राष्ट्रपति बाइडेन बोले टेक्सास जज के फैसले के खिलाफ लड़ेंगे
इस पूरे मामले पर खुद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि वो टेक्सास जज के फैसले के खिलाफ लड़ेंगे। अगर ये फैसला कायम रहता है तो इससे न सिर्फ टेक्सास की बल्कि पूरे अमेरिका की महिलाओं के दवा के इस्तेमाल पर रोक लग जाएगी।
दरअसल, छठब् की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में आधे से ज्यादा गर्भपात में पिल्स का इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिका में साल 2019 में 6 लाख 30 हजार गर्भपात किए गए थे। साल 2000 में अमेरिका के फूड एंड ड्रग विभाग ने गर्भपात के लिए दवाओं के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी थी। तब से वहां गर्भनिरोधक दवाओं का इस्तेमाल बढ़ा है। वहीं, ॅभ्व् की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में हर साल 73 मिलियन अबॉर्शन होते हैं।
अमेरिका में अबॉर्शन को गैर कानूनी बनाने को लेकर दुनियाभर में प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। वहीं जर्मनी ने इसके उलट हिटलर के जमाने से अबॉर्शन से जुड़े विज्ञापनों पर लगे बैन को हटा लिया है। वहां गर्भपात से जुड़ी जागरूकता नहीं होने की वजह से स्वास्थ्यकर्मियों और डॉक्टरों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा था। कई डॉक्टरों पर केस दर्ज किए गए थे। जर्मनी में 12 सप्ताह तक की प्रेग्नेंसी में अबॉर्शन लीगल है। इन खबरों के बीच सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन की खूब चर्चा हो रही है। 50 साल पुराना यह ऐड भारत का है। इसमें लिखा है३अबॉर्शन लीगल है, अबॉर्शन सुरक्षित है। अबॉर्शन एक साधारण प्रक्रिया है यदि आप डॉक्टर से सही समय पर संपर्क कर लें।

0 Response to "अमेरिका में अबॉर्शन पर फिर हंगामा"
एक टिप्पणी भेजें