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टोंक महोत्सव पर कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन

टोंक महोत्सव पर कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन

 



टोंक। टोंक महोत्सव पर गुरुवार को जिला प्रशासन एवं टोंक महोत्सव समिति तथा अंजुमन समिति खानदान-ए-अमीरीया के सहयोग से कृषि ऑडिटोरियम में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में सर्द रात में भी कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कवि सम्मेलन में मध्य प्रदेश के हास्य कवि कुलदीप रंगीला लेटर फ्रेम हास्य कवि विजय विचित्र एवं शक्करगढ़ के हास्य गीतकार राजकुमार बादल, मंच संचालक कवि प्रदीप पंवार, उदयपुर की कवियत्री भावना भव्या, बिहार की कवयित्री उषादास, अंता के राजस्थानी गीतकार विष्णु विश्वास ने श्रोताओं की जमकर वाह-वाही लूटी। स्थानीय कवि मानक चंदसोदा, कवि गोविंद भारद्वाज, कवयित्री रेखा जैन और ममता मंजुला के काव्य पाठ को भी श्रोताओं ने ख़ूब सराहा।

कवि सम्मेलन में सरस्वती वंदना तथा विष्णु विश्वास के गीत

गोरी थारो डील इतर की सीसी, सोरम की लपट उड़ छे थारो मन गंगा को पानी पाप्यां का पाप झड़ छ.. ने श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। हास्य गीतकार राजकुमार बदलने सबको हंसाते हुए अपने गीत में बेटियों को संदेश दिया कि खुद के हाथां लगा आग मत लाडली, अपणा कुल के लगा दाग मत लाडली, कतरा टुकडा मे कटकट के बट जावसी, बणठण डोली मे जा भाग मत लाडली.. तो खूब तालियां बजी।

मंच संचालक कवि प्रदीप पंवार के मंच संचालन, नोंक-झोंक और टोंक पर गीत प्यार मोहब्बत इश्क इत्र से जहां महकता चाहत चौक, मंदिर मस्जिद गले मिले हैं, सद्भाव से सीना ठोक, यह अपना टोंक, यह प्यारा टोंक, हर शहर से न्यारा टोंक को खूब वाह-वाही मिली। उदयपुर की भावना भव्या को समाहित प्रेम ना हो तो मधुर वे स्वर नहीं लगते हमे उनसे कहीं पर भी कोई बेहतर नहीं लगते भले ही आप काजल से नयन अपने सजा लो पर! छिपी ना लाज जिनमें वो नयन सुन्दर नहीं लगते काव्यपाठ पर बहुत दाद मिली।

कुलदीप रंगीला ने हंसाते हंसाते अपनी कविता पेश की

स्वरों को जन्म देकर भी उंगलियां छूट जाती है, महल मिलते ही बचपन की वो गलियां छूट जाती है वह ईश्वर हो या मानव हो यह नियम सब पर लागू है सुदर्शन हाथ में हो तो मुरलिया छूट जाती है सुनाकर श्रोताओं को आनंदित कर दिया। विजय विचित्र ने खूब हंसते हंसाते जिस धरती पर महाँकाल का डमरू बजता है डम-डम जिस धरती पर गुंजीत होता रहता है हर हर बम बम. जिस धरती ख्वाजा ने फेहराया इस्लामी परचम. जिस धरती पर अल्ला हूँ अकबर बोला जाता हर डम जिस धरती पर जिस मिट्टी मे राम कृष्ण ने लिया जनम. पाप को पराजित कर के जहाँ विजयता बना धरम. उस धरती के विजय मंत्र को गाने मे न करो सरम.. दोनों हाथ ऊंचे उठा कर बोलो वन्दे मातरम... सुनाकर सांप्रदायिक सद्भाव को अपने ही अंदाज में अभिव्यक्त किया।

उषा दास ने दुमदार दोहे और मंच संचालक से नोंक-झोंक के साथ अपनी इन पंक्तियों से मां शारदे कर दो कृपा सुरभित ही छंद हो, हर्षो विषाद में सदा अपनो का संग। वागेश्वरी संभालना नव युग के खंड को, हर एक पीढ़ी में नए विवेकानंद हो.. अपनी छाप छोड़ी। स्थानीय कवित्री रेखा जैन ने गज़ल हम लोग तो दीवाने दुनियां को जगा देंगे। हम खाक उसे कर दे जो हमको दगा़ देंगे.. अपना प्रभाव जमाया। स्थानीय कवित्री ममता मंजुला ने खतों वाले ज़माने लौट कर अब क्यों नहीं आते। वो पैगाम-ए-मुहब्बत भी कबूतर क्यों नहीं लाते सुनाकर खूब दाद पाई। स्थानीय कवि माणक चंद सोदा ने अपने अंदाज में नर का मित्र है नर, नर का दुश्मन नर.. श्रोताओं को खूब हंसाया। स्थानीय कवि गोविंद भारद्वाज ने भी अपनी रचना सुनाई।

कवि सम्मेलन में जिला कलेक्टर डॉ. ओम प्रकाश बैरवा, अतिरिक्त जिला कलेक्टर डॉ. सूरज सिंह नेगी, उपखंड अधिकारी कपिल शर्मा, अरबी फारसी शोध संस्थान के पूर्व निदेशक मुजीब अता आज़ाद, पूर्व सभापति लक्ष्मी जैन, वृत्ताधिकारी टोंक सलेह मोहम्मद, कृषि विभाग के उप-निदेशक के. के. मंगल, एडीईओ चौथमल चौधरी, प्रधानाचार्या कृष्णा चौधरी, व्यापार संघ के अध्यक्ष मनीष बंसल ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा कवियों का स्वागत कर कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। कवि सम्मेलन में नवाब आफताब अली खान, नवाबजादा हामिद अली खान, सुजीत सिंहल, शायर डॉ. जिय़ा टोंकी, विनायक जैन, दुर्गेश गुप्ता, भगवान भंडारी, साहिबजादा अब्दुल मुनीम खान, गोपाल नटराज, डीडी मंगल, पंडित मुकेश शर्मा, विकास विजयवर्गीय, भारत नरूका, केसर लाल गुर्जर, रमेश साहू एवं नवल साहू सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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