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 ऐसे तो सभी पाकिस्तानी और बांग्लादेशी भारत में आ जाएंगे....

ऐसे तो सभी पाकिस्तानी और बांग्लादेशी भारत में आ जाएंगे....

  • नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लागू करने का मुद्दा

(एस.पी.मित्तल)

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अजमेर | 10 फरवरी को लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट कहा है कि आम चुनाव से पहले देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू कर दिया जाएगा। ताकि राजस्थान से लेकर पश्चिम बंगाल में जो हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन समुदाय के लोग शरणार्थी बनकर रह रहे हैं, उन्हें भारत की नागरिकता मिल सके। यूं तो सीएए तीन वर्ष पहले ही लागू हो जाना चाहिए था, लेकिन मुस्लिम संगठनों के विरोध के चलते इसे लागू नहीं किया जा सका। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि कानून में मुसलमानों को भी शामिल किया जाए। यानी जो मुसलमान पाकिस्तान और बांग्लादेश से आना चाहता है उसे भी भारत की नागरिकता दी जाए।  यदि मुस्लिम संगठनों की इस मांग को मान लिया जाए तो पाकिस्तान और बांग्लादेश के अधिकांश मुसलमान भारत में आ जाएंगे। पाकिस्तान और बांग्लादेश के जो हालात है उस में अधिकांश नागरिक भारत को पसंद करते हैं। पाकिस्तान के न्यूज़ चैनलों पर तो पाकिस्तान के लोग खासकर महिलाएं भारत की तारीफ करती है। आम पाकिस्तानियों का मानना है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने बहुत तरक्की की है और भारत में रहने वाला मुसलमान शांति और समृद्धि के साथ रह रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि दुनिया के मुस्लिम देशों के मुकाबले में भारत में रहने वाले मुसलमान ज्यादा सुरक्षित है। सीएए कानून का मकसद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर प्रताड़ित होने वाले अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देना है। असल में इन तीनों मुस्लिम देशों में हिंदू, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध समुदाय के लोगों को धर्म के आधार पर बुरी तरह प्रताड़ित किया जाता है। पाकिस्तान में तो जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाता है। जो हिंदू, सिख आदि धर्म परिवर्तन नहीं करते उनके परिवार की महिलाओं का अपहरण कर लिया जाता है। यही वजह रही कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से बड़ी संख्या में हिंदू और सिख नागरिक भारत आ कर बस गए, लेकिन ऐसे लाखों नागरिकों को शरणार्थी का जीवन जीना पड़ रहा है। भारत की नागरिकता नहीं होने की वजह से ऐसे शरणार्थी अधिकारों से वंचित है। अब जब नागरिकता मिल जाएगी तो भारत में सरकारी सुविधाओं का लाभ भी मिलने लगेगा। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने शरणार्थियों की पीड़ा को समझा और नागरिकता देने के लिए कानून में संशोधन किया। पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुसलमानों को नए कानून के दायरे में लाने की मांग पूरी तरह बेमानी है, क्योंकि इन मुस्लिम देशों में किसी भी मुसलमान को धर्म के आधार पर प्रताड़ित नहीं किया जाता। पाकिस्तान का जन्म तो मुस्लिम धर्म के आधार  पर ही हुआ है। ऐसे में किसी मुसलमान को धर्म के आधार पर प्रताड़ित करने का सवाल ही नहीं उठता। भारत के जो मुस्लिम संगठन सीएए का विरोध कर रहे हैं उन्हें इस कानून की भावना को समझना चाहिए। इस नए कानून से भारत में रहने वाले किसी भी मुसलमान की नागरिकता  नहीं छीनेगी। यह कानून सिर्फ प्रताड़ित नागरिकों के लिए है। कुछ मुस्लिम संगठन बेवजह भारत के मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं। नए कानून में जब नागरिकता छीनने का कोई प्रावधान ही नहीं है तो फिर मुसलमानों के विरोध का कोई मतलब नहीं है। यदि प्रताड़ित हिंदुओं को भारत की नागरिकता दी जाती है तो मुसलमानों को विरोध का क्या अधिकार है? जब पाकिस्तान में हिंदुओं को रहने नहीं दिया जाता तो ऐसे हिंदू भारत में ही शरण लेंगे। 


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