निलंबित ASP दिव्या को तीन दिन की रिमांड पर भेजा
SOG ने पांच दिन की रिमांड मांगी थी, गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज
अजमेर | 2 करोड़ रुपए की घूस मांगने के मामले में आरोपी निलंबित ASP दिव्या मित्तल को रविवार दिन में करीब 4 बजे एसओजी की टीम कोर्ट में लेकर पहुंचे। इसके बाद जज के घर ले जाया गया। एसओजी ने पांच दिन का रिमांड मांगा था। तीन दिन (4 अप्रैल) की रिमांड दी गई है। एडिश्ननल एसपी एसओजी जोधपुर के कमल तंवर जज के घर लेकर पहुंचे हैं। दिव्या को लोहाखान सिविल लाइंस स्थित जज गौरव गर्वा के निवास पर पेशी के लिए लाया गया था। एडिशनल एसपी कमल सिंह तंवर ने बताया- मामले में दिव्या मित्तल को जयपुर ले जाकर पूछताछ की जाएगी।
एडिशनल एसपी कमल तंवर ने बताया- पुलिस अधिकारी को निर्धारित कर्तव्यों का पालन करना होता है, लेकिन दिव्या ने कर्तव्य पालन में त्रुटि की। इसका फायदा आरोपी को मिला। यह लापरवाही अपराध है। दिव्या को एनडीपीएस के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने बताया कि रामगंज थाने में दर्ज मामले में आरोपी सुनील नंदवानी को गिरफ्तारी की अनुमति मिलने के बावजूद उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। जबकि वह पूछताछ के दौरान कस्टडी में था। प्रकरण सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। जहां से उसे जमानत मिली। इसी तरह प्रकरण संख्या 183 में भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया।
अनुसंधान में लापरवाही
एडिशनल एसपी कमल सिंह तंवर के अनुसार आरोपी दिव्या के खिलाफ अजमेर के रामगंज थाने में 24 मई 2021 को एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22 व 8/29 के तहत दर्ज मामले की जांच में लापरवाही के आरोप में जांच एजेंसियां पूछताछ कर रही है। इसी क्रम में 3 मामलों में 2 प्रकरण ( संख्या 183,195) रामगंज व एक ( संख्या 139) अलवर गेट थाने में दर्ज थे। इनकी जांच 27 फरवरी 2030 को एसओजी को दी गई थी। एसओजी को इन मामलों की जांच में लापरवाही मिली।
शनिवार को जेल के बाहर से किया था गिरफ्तार
दिव्या मित्तल को जमानत के एक दिन बाद ही शनिवार को अजमेर जेल के बाहर से एसओजी ने फिर गिरफ्तार कर लिया था। एसओजी के पास दर्ज एनडीपीएस के तीन केसों में दिव्या ने जांच सही तरीके से नहीं की थी। एडीजी एसओजी अशोक राठौड़ ने बताया था कि दिव्या मित्तल के खिलाफ अभी तक एसओजी में कोई शिकायत दर्ज नहीं है। दिव्या के पास एनडीपीएस की 3 फाइलें थीं। इसकी जांच वह काफी समय से कर रही थी। इन फाइलों में मित्तल की ओर से जांच में गड़बड़ी करना सामने आया है। इसलिए एनडीपीएस एक्ट के तहत जांच अधिकारी दोषी होता है।
उन्होंने बताया कि दिव्या मित्तल को आज अजमेर जेल के बाहर से गिरफ्तार किया गया। दिव्या एसीबी की गिरफ्त में आने के 100 दिन बाद अजमेर जेल से बाहर आई थी।
ये था मामला
2 करोड़ की रिश्वत मांगने के मामले में जयपुर ।ब्ठ टीम ने अजमेर में 16 जनवरी को ैव्ळ की ।ैच् दिव्या मित्तल को पकड़ा गया था। दिव्या मित्तल को एसीबी की टीम अजमेर से जयपुर लाई थी। इसके बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। दिव्या ने मादक पदार्थ तस्करी के मामले में हरिद्वार की फार्मा कंपनी के मालिक को गिरफ्तार नहीं करने की एवज में बर्खास्त पुलिसकर्मी सुमित कुमार के माध्यम से यह घूस मांगी थी।
जहां से शुरू हुई घूसखोरी की कहानी३
दरअसल, ।ैच् दिव्या मित्तल ने नशीली दवाओं की तस्करी को लेकर अजमेर के रामगंज थाने में दो और अलवर गेट थाने में एक मिलाकर कुल 3 थ्प्त् दर्ज की थी। तीनों ही मामलों में देहरादून स्थित दवा कंपनी हिमालय मेडिटेक के डायरेक्टर सुनील नंदवानी को आरोपी बनाया था। रामगंज थाने में दर्ज दोनों मामले क्लब कर इन्वेस्टिगेशन चल रही थी और अधिकतर आरोपी इन्हीं मामलों में पकड़े जा रहे थे।
ज्यादा मजबूत केस भी यही (रामगंज थाना) था। इसके बावजूद दिव्या ने नंदवानी को अलवर गेट थाने में दर्ज मामले में कमजोर धाराओं में अरेस्ट किया था। नंदवानी ने कोर्ट में जमानत अर्जी दी तो दिव्या ने कोर्ट से ये तथ्य भी छुपाया कि वो अन्य क्लब मामलों में भी आरोपी है। ऐसे में नंदवानी को हाईकोर्ट से 15 दिन बाद ही आसानी से जमानत मिल गई थी। इसी मामले में दिव्या मित्तल ने 1 करोड़ की घूस ली थी।
।ब्ठ की ट्रैप कार्रवाई से पहले दिव्या ने उत्तराखंड के हरिद्वार में दवा फैक्ट्री श्रच्म्म् ड्रग्स के मालिक विकास अग्रवाल से भी 2 करोड़ की घूस मांगी थी। नशीली दवाओं की सप्लाई में कोई भूमिका नहीं होने के बावजूद दिव्या की धमकियों से परेशान हो विकास अग्रवाल ने एसीबी की शरण ली।
19 मिनट का ऑडियो, खुल गए सारे राज३
विकास अग्रवाल ने अजमेर के अलवर गेट थाने के दूसरे केस में पहले ही गिरफ्तार हो चुके सुनील नंदवानी के भाई संजय नंदवानी से मोबाइल पर करीब 19 मिनट और 4 सेकेंड की बातचीत की। इस बातचीत में संजय नंदवानी ने विकास अग्रवाल से दिव्या को लेकर कई बड़े खुलासे किए और माना कि बार-बार की धमकियों और टॉर्चर से परेशान होने के बाद उसने दिव्या के बताए अनुसार पुष्कर स्थित एक होटल में एक करोड़ रुपए की रिश्वत दी थी, तभी जाकर उसके भाई सुनील नंदवानी की जमानत हो पाई।
दिव्या मित्तल के रिसोर्ट पर चला था बुलडोजर
मामले में करीब एक महीने पहले दिव्या मित्तल के उदयपुर स्थित आलीशान रिसोर्ट पर प्रशासन ने बुलडोजर चला था। बुलडोजर से रिसोर्ट के निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया था। बताया गया था कि दिव्या मित्तल ने यूआईटी से शहर से करीब 25 किमी दूर चिकलवास गांव में फॉर्म हाउस के लिए जमीन की मंजूरी ली थी, लेकिन यहां रिसोर्ट बनाकर कॉमर्शियल उपयोग किया जा रहा था। ऐसे में यूआईटी ने पहले तो नोटिस देकर जवाब मांगा, लेकिन जवाब नहीं मिला तो यूआईटी टीम कार्रवाई करने पहुंच गई थी।
लग्जरी लाइफ का शौक
दिव्या से जुड़े लोगों ने बताया था कि उसे हमेशा से लग्जरी लाइफ का शौक है। उदयपुर में एक रिसोर्ट नेचर हिल पैलेस के बारे में तो ज्यादातर लोगों को पता है, लेकिन इसके अलावा भी कई प्रॉपर्टी हैं, जो दिव्या ने अपने रिश्तेदारों के नाम से खरीदी है। दिव्या के नजदीकियों का कहना था कि वो हर साल प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करती थी।
दिव्या की पर्सनल लाइफ भी उतार-चढ़ाव भरी रही है। जून 2014 में दिव्या की मुलाकात सोशल मीडिया पर हिसार के ब्। प्रतीक से हुई। तीन महीने बाद दोनों उदयपुर में मिले। दिव्या के घरवाले शादी के लिए राजी थे। प्रतीक ने दिव्या से कहा कि गुड़गांव में उसकी मां की रजामंदी के बाद ही शादी करेंगे।
दिव्या और उसके पिता विनोद मित्तल दिल्ली गए थे। वे कई दिनों तक वहीं रुके, लेकिन प्रतीक की मां से मुलाकात नहीं हुई। इसके बाद प्रतीक और दिव्या ने गुपचुप मंदिर में शादी कर ली थी। तय किया कि कुछ दिनों के बाद प्रोग्राम में शादी कर लेंगे। इसके बाद दोनों पति-पत्नी के रूप में किराए के मकान में साथ रहने लगे। दोनों भरतपुर, उदयपुर, मथुरा में भी साथ रहे थे।
दिव्या के पिता विनोद मित्तल ने 2015 में हिसार पुलिस को दहेज प्रताड़ना की शिकायत दी थी। विवाद होने के बाद दोनों के बीच में तलाक हो चुका है।
45 साल पहले हरियाणा से झुंझुनूं आया था परिवार
दिव्या मित्तल का परिवार मूलतः हरियाणा में चरखीदादरी के पास गांव का रहने वाला है। करीब 45 साल पहले परिवार हरियाणा से झुंझुनूं के चिड़ावा में शिफ्ट हो गया था। पिता ने ट्रैक्टर की एजेंसी खोली थी। बाद में एजेंसी बंद कर दी थी। दिव्या दो भाई और तीन बहनों में सबसे छोटी है।
दिव्या ने चिड़ावा में स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई पूरी की थी। भाई पहले बस और माइनिंग का काम करते थे। एक भाई अभी पिलानी (झुंझुनूं) में बिजनेस कर रहा है। दूसरे भाई का प्रॉपर्टी और माइनिंग का काम है। दिव्या के माता-पिता अभी भी गांव में ही रहते हैं।

0 Response to "निलंबित ASP दिव्या को तीन दिन की रिमांड पर भेजा"
एक टिप्पणी भेजें