संसदीय समिति ने दिए कई सुझाव, कहा- शहरी परिवहन के लिए व्यापक योजना की जरूरत
नई दिल्ली। देश के ज्यादतर शहर सड़कों पर जाम और ट्रैफिक से संबंधित तमाम अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, लिहाजा शहरी परिवहन के लिए व्यापक योजना बनाने की जरूरत है। एकीकृत शहरी परिवहन योजना से ही एक प्रभावी, सुविधाजनक और तीव्र आगाममन का ढांचा तैयार हो सकता है।
मेट्रो परियोजनाओं के एलान की बढ़ती प्रवृत्ति पर जताई चिंता
इस टिप्पणी के साथ संसद की एक स्थायी समिति ने इस पर चिंता भी जताई है कि जरूरत और व्यवहार्यता को लेकर पूरा अध्ययन किए बिना शहरों के लिए मेट्रो परियोजनाओं की घोषणा करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ती जा रही है। इस प्रवृत्ति के तहत न तो यह देखा जाता है संबंधित शहर में आबादी का घनत्व क्या है, वह कितना बड़ा या छोटा है अथवा मेट्रो की वहां कितनी जरूरत है।
इसका नतीजा यह होता है कि न तो घोषणा पर सही तरह अमल हो पाता है और न संसाधनों का समुचित इस्तेमाल हो पाता है। इसके चलते वे तमाम कीमती संसाधन व्यर्थ हो जाते हैं, जिनका कहीं और उचित तरीके से उपयोग हो सकता था।
शहरों में परिवहन का ढांचा सुधारना बड़ी चुनौती
संसदीय समिति के ये निष्कर्ष इसलिए और अधिक अहम हैं, क्योंकि शहरों में परिवहन का ढांचा सुधारना दशकों से एक बड़ी चुनौती रहा है। अपर्याप्त बसें, सार्वजनिक परिवहन की बेतरतीब स्थिति, यात्रियों की सुविधाओं और जरूरतों की अनदेखी ने शहरों में आवागमन को टैंपो-टैक्सी के हवाले कर दिया है।
बसों की संख्या बढ़ाने की तमाम घोषणाएं पूरी नहीं हुईं
देश में कुल वाहनों के बेड़े में बसों की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम बनी हुई है। परिवहन के लिए अधिक सुविधाजनक और पर्यावरण से लेकर लागत तक हर लिहाज से अधिक फायदेमंद मानी जाने वाली बसों की संख्या बढ़ाने की तमाम घोषणाएं पूरी नहीं हुईं। इस पृष्ठभूमि में समिति ने शहरी कार्य मंत्रालय से कहा है कि अर्बन ट्रांसपोर्ट प्लानिंग और कैपेसिटी बिलिं्डग योजना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। समिति ने मंत्रालय से सिफारिश की है कि वह 31 मार्च को समाप्त हुई इस योजना की समीक्षा करे और उसे विस्तार देने पर विचार करे।
18 हजार करोड़ रुपये की एक नई योजना की घोषणा
बीस हजार बसों का इंतजारसार्वजनिक बस परिवहन को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 के बजट भाषण में 18 हजार करोड़ रुपये की एक नई योजना की घोषणा की थी। यह कहा गया था कि योजना के तहत पीपीपी माडल के नए तौर-तरीकों को लागू करने की कोशिश की जाएगी ताकि 20000 से अधिक बसों के लिए फाइनेंस, अधिग्रहण, संचालन और रखरखाव में निजी क्षेत्र को अवसर मिल सके।
मिशन मोड में लागू करने की सिफारिश
यह योजना अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी। हालांकि संसदीय समिति ने कम से कम अपनी दो रिपोर्टों में इस योजना की प्रगति के बारे में न केवल सवाल किया, बल्कि इसे मिशन मोड में लागू करने की सिफारिश भी की। शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार प्रस्तावित योजना का ड्राफ्ट कैबिनेट नोट मंजूरी के लिए मई, 2022 में वित्त मंत्रालय के पास भेजा गया था और इसे कभी भी कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है।
मिशन मोड में लागू करने की सिफारिश
यह योजना अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी। हालांकि संसदीय समिति ने कम से कम अपनी दो रिपोर्टों में इस योजना की प्रगति के बारे में न केवल सवाल किया, बल्कि इसे मिशन मोड में लागू करने की सिफारिश भी की। शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार प्रस्तावित योजना का ड्राफ्ट कैबिनेट नोट मंजूरी के लिए मई, 2022 में वित्त मंत्रालय के पास भेजा गया था और इसे कभी भी कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है।

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