अक्षय तृतीया पर आयोजित होने वाले तीन दिवसीय भव्य मेले का हुआ शुभारंभ
रविवार, 23 अप्रैल 2023
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नटवाडा मे श्री बद्रीनाथ मन्दिर के शिखर पर गुरगल चिडिया बैठने से ग्रामीणो में दौडी खुशी की लहर
शोभायात्रा पर सर्व समाज ने बरसाए जगह जगह पुष्प
निवाई- | ग्राम पंचायत नटवाडा़ में स्थित श्री बद्री विशाल मन्दिर में अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर आयोजित होने वाले तीन दिवसीय वार्षिक मेले का शुभारम्भ शनिवार को प्रात: कनक दण्डवत यात्रा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ इस दौरान नव संवत्सर का शगुन देखने के लिए हजारो श्रदालु उमड पडेे। सरपंच नीता कंवर व उपसरपंच कैलाशी देवी ने बताया कि ध्वजा फहराने से पूर्व वर्षो से चली आ रही परम्परा के अनुसार मंगलवार की सुबह नटवाडा ठिकाने के गढ में ठाकुर लक्ष्मण करण राठौड के बडे पुत्र कुॅ. पुण्य प्रताप करण व भंवर केशव देव के सानिध्य में विधिवत मंत्रोच्चारण के बाद सात तरह के अनाज एवं ध्वजा का पूजन करने के बाद बैण्ड बाजे एवं झालर, शंख व नंगाडो की मधुर ध्वनि एवं श्री बद्री विशाल भगवान के जयकारो के साथ शोभा यात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा में महिलाओ द्वारा मंगल गीत गाने और भगवाने के जयकारो से माहौल भक्तिमय हो गया। शोभा यात्रा गढ से शुरू होकर सीतारामजी से होती हुई मुख्य बाजार से जाटो के मोहल्ले से होती हुई श्री बद्री विशाल के मन्दिर पहुची। इस दौरान मन्दिर के ध्वजा को भगवान के चरणों में अर्पित कर सम्पूर्ण विधि विधान से पूजा-अर्चना कर गॉंव के पंच-पटेलो के सानिध्य में मन्दिर के शिखर पर ध्वजा फहराई गई एवं इसके बाद मन्दिर के शिखर पर बैठने वाले पक्षी का शगुन देखा गया एवं रात मे भीगी हुई चने की दाल एवं पतासो का प्रसाद वितरित किया गया। इसके बाद सभी ग्रामीणो ने घरो में पकवान बनाकर दाल-पतासो के साथ भगवान को भोग लगााकर एक-दुसरे को शुभ शगुन होने की बधाईयां दी। नटवाडा सहित पराना, शुक्लपुरा, भांची-देवली, गोपालपुरा, मण्डावर, वजीराबाद, खलीलाबाद, हनीफनुर सहित आसपास के गांवो के श्रद्वालुओ ने भगवान श्री बद्रीनाथ के मन्दिर में माथा टेक मनौतिया मांगी।
सुण ली म्हारा बद्रीनाथ न
नटवाडा में श्री बद्री विशाल भगवान के मन्दिर में अक्षय तृतीया के अवसर पर ध्वजा फहराने के बाद चारो ओर सन्नाटा छा गया सबकी नजरे पर बैठने वाले प्रथम पक्षी के बैठने के इन्तजार में टकटकी लगाये मन्दिर के शिखर पर टिकी थी तभी एक गुरगल चिडिया मन्दिर के शिखर पर आकर बैठने के साथ ही चारो ओर एक ही आवाज गूंज उठी सुण ली म्हारा बद्रीनाथ न। इसी के साथ हर श्रद्वालु के चहेरे पर खुशी लहर दौड गई । ग्रामीणो ने बताया कि मन्दिर के शिखर पर चिडिया पक्षी बैठना शुभ माना जाता हैं एवं ध्वाजा फहराने के बाद ज्वार, मूंगफली, मूंग एवं तिल सहित 4 अनाजो की ढेरिया बिखरी मिली। जिससे खरीब एवं रबी की फसले अच्छी होने की उम्मीद हैं । गौरतलब हैं कि शिखर पर बैठने वाले पक्षी में गरूड, तोता, गुरगल पक्षी एवं चिडिया सुकाल का प्रतीक हैं वही कौआ अकाल का प्रतीक हैं।
मुख्य मार्गो को भगवा रंग से सजाया
अक्षय तृृतीया के पर्व पर निकाली गई शोभायात्रा का कई सामाजिक संगठनो एवं ग्रामीणो द्वारा कदम-कदम पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया जिससे मार्गो पर फूलो के पंखो की परत जम गई और रास्ते भगवा रंग में नजर आने लगे। वही श्री बद्रीनाथ एवं सनातन धर्म के जयकारो से गुंजायमान नाटेश्वर नगरी हो गई। चारो ओर भक्ति का माहौल हो गया। मन्दिर परिसर में कई समाजसेवियो द्वारा श्रदालुओ को ग्रामीणो द्वारा ठण्डा पेय एवं शरबत पिलाई गई । इस अवसर पर आसपास के गांवो से कई पदयात्राएं आई । ध्वजा फहराने के बाद भगवान श्री बद्री विशाल को पोशाक चढाने वालो की होड मची रही ।
रात मे भीगी चने की दाल का प्रसाद है चमत्कारी
नटवाडा बद्री विशाल के वितरित होने वाले विशेष प्रसाद की भी महिमा है। यहां पर रात मे चने की दाल को भिगोया जाता है और सुबह भगवान बद्री विशाल को चनादाल व बताशो का भोग लगाया जाता है। प्रसाद मे वितरित होने वाली दाल व बताशो की सामाग्री भी श्रद्वालुओ की तरफ से मंदिर मे चढाई जाती है । प्रसाद सामाग्री चढाने के लिए श्रद्वालु अपनी बारी का इंतजार करते है। इस प्रसाद के सेवन व यहा सेवाभाव से रहने से भी कई असाध्य रोग ठीक हो जाते है।
बद्री विशाल की 1261 वर्ष पुरानी मूर्ति है चमत्कारी
मंदिर है प्राचीन
ग्रामीणों ने बताया कि भारत के चारों धामों में महाधाम श्री बद्री विशाल धाम जो भारत के उत्तराखण्ड में स्थित है या फिर नाटेश्वर नगरी नटवाड़ा में है। इस मन्दिर में विराजमान श्री बद्री विशालजी की प्रतिमा उत्तराखण्ड स्थित तप्त कुण्ड से लगभग 1261 वर्ष पूर्व श्रीअर्जुन भारती गोस्वामी द्वारा लाकर मठ मन्दिर में स्थापित करवाई थी एवं गर्भगृह में भगवान भोलेनाथ स्वयं नाटेश्वर स्वरूप में स्वयंभू प्रकट हुये शिवपुराण वर्णनानुसार भी घुश्मेश्वर महादेव के चार द्वार हैं जिनमें पश्चिमी द्वार नाट्यशाला द्वार है जो ग्राम नटवाड़ा में ही स्थित है।
मंदिर की सीढीयो पर लगे है चांदी के सिक्के
नटवाडा मे स्थित प्राचीन बद्रीनाथ मंदिर मे चांदी के सिक्के लगे है जो मंदिर मे बहुत प्राचीन समय के प्रतीत होते ग्रामीण बताते है कि सिक्को का इतिहास भी वर्षो पुराना है जो मंदिर के अतीत से जुडा हुआ है।
सेवाभाव से रहने व सच्चे मन से प्रार्थना करने पर होती है मनोकामना पूर्ण
नटवाडा के कई ग्रामीणो ने बताया कि मंदिर मे किसी भी श्रद्वालु ने सच्चे मन से प्रार्थना की है तो वह कभी खाली हाथ नही लोटता श्रद्वालुओ की सभी तरह की मनोकामंनाए पुरी होती है कई दंपत्तीयो ने बताया कि संतान ना होने पर या पुत्र ना होने पर भगवान बद्री विशाल से मन्नत मांगने पर भगवान बद्री नाथ अवश्य मन्नते पुरी करते है। कई निसंतान श्रद्वालुओ ने तो संतान होने पर अपने पुत्रो को बद्री विशाल की सेवा मे समर्पित किया है।

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