सरपंचों के बाद ग्राम विकास अधिकारी भी आंदोलन पर
सरपंच, VDOऔर पटवारियों के हड़ताल पर जाने से लोगों के अटके काम
सवाई माधोपुर | चुनावी साल में कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। सरकारी पैसा नहीं आने से नाराज सरपंचों ने पिछले 2 दिनों से पंचायतों पर तालाबंदी कर रखी है। वहीं शुक्रवार से टक्व् (ग्राम विकास अधिकारी) पूर्व में हुए समझौते का लागू नहीं करने पर अनिश्चितकाल के लिए सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। इसके साथ-साथ पटवारी भी हड़ताल पर है। हड़ताल से लोगों के काम पूरी तरह से अटक गए हैं जिससे लोगों को खासी परेशानियों हो रही है। सरपंचों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। तब तक पंचायतों पर तालाबंदी रहेगी।
ग्राम पंचायतों में विकास के लिए राज्य वित्त आयोग और केंद्रीय वित्त आयोग के तहत समय-समय पर राशि दी जाती है। यह राशि सभी ग्राम पंचायतों में उनके जनसंख्या के आधार पर दी जाती है। राज्य सरकार ने राज्य वित्त आयोग में एक ग्राम पंचायत को साल भर में 30 से 40 लाख की किस्त मिलती है जिसके तहत गांव में सड़क, पानी बिजली आदि को लेकर काम किए जाते हैं।
इसी तरह केंद्रीय वित्त आयोग से भी लगभग इतनी ही राशि दी जाती है। जिसमें मुख्य रूप से सफाई, नाली, नाला निर्माण के साथ-साथ अन्य विकास कार्यों में पैसा खर्च किया जाता है। सरपंचों ने बताया कि साल 2022-23 में आधा बजट भी ग्राम पंचायतों को नहीं मिला है। इसके साथ ही पिछले 5 महीनों से राज्य वित्त आयोग व केंद्रीय वित्त आयोग दोनों की ही किश्त नहीं आ रही है। वर्तमान में राजस्थान की पंचायतों को 3 हजार करोड़ रुपए की राशि की सरकारी किश्त बकाया है। जिसके चलते पंचायतों में विकास का पहिया लगभग ठप सा हो गया है।
ग्रामीण विकास के साथ राजस्व कार्य भी ठप
एक और जहां पंचायत राज्य के सरपंच एवं ग्राम विकास अधिकारी हड़ताल पर चले गए हैं। वही राजस्व कर्मचारी भी हड़ताल पर जाने के कारण पंचायत राज के साथ-साथ राजस्व विभाग के कार्य भी नहीं हो रहे हैं। लोगों को जन्म मृत्यु से लेकर नामांतरण खुलवाने तक परेशानी हो रही है। इसके साथ ही 24 अप्रैल से लगने वाले महंगाई राहत शिविर को लेकर भी खतरा मंडरा गया है। जिले में 230 सरपंच, 309 पटवारी तथा 250 ग्राम सेवक हड़ताल पर चले गए हैं।

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