कारवां- द मैजिकल मिस्ट्री ने खूब बटोरी तालियां
200 साल पुराने खजाना महल में दिखा जादू, थिएटर और लाइट एंड साउंड का अनोखा नजारा
जयपुर | जलमहल के सामने बने खजाना महल में शनिवार रात एक अलग तरह का नजारा था। मुकेश खन्ना, गुफी पेंटल, राकेश श्रीवास्तव जैसे नामचीन एक्टर्स की आवाज में जयपुर थिएटर के कलाकार ऐतिहासिक कहानी को बयां करते रहे। हेमंत सोनी के मैजिक परफॉर्मेंस के साथ राजस्थानी लोक नृत्य और शहजोर अली के लाइटिंग इफेक्ट्स ने पूरी माहौल को खास बना दिया। हाउसफुल ऑडियंस के बीच अनूप श्रीवास्तव और प्रदीप गुप्ता के लिखित और निर्देशित नाट क कारवां द मैजिकल मिस्ट्री का मंचन 200 साल पुराने खजाना महल के सामने बने मंच पर किया गया।
ऐतिहासिक कहानी को जिस तरह से प्रस्तुत किया गया, वह किसी मैजिकल शो से कम नहीं दिखा। थिएटर शो के इस तरह के प्रयोग आज तक स्थानीय स्तर पर नहीं किए गए, जिसकी तारीफ हर कोई करता आया।
ब्लू आइज एंटरटेनमेंट के बैनर तले प्रस्तुत यह शो अब प्रतिदिन खजाना महल में शाम 7. 30 बजे होगा। कारवां- द मैजिकल मिस्ट्री प्ले राजस्थान की सतरंगी सांस्कृतिक परिवेश और राजशाही समाज से लिए गए कथानक का काल्पनिक रूपांतरित नाटक है। यह 1890 के दशक की कहानी है, जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी पूरे भारत पर कब्जा करने की कोशिश कर रही थी। कहानी बलिदान और वीरता के इर्द-गिर्द घूमती है। साम्राज्य की राजकुमारी अपनी मां की आकस्मिक मृत्यु से अवसाद में चली जाती है और फिर कैसे एक रमता जोगी बंजारा,पवन चुनौतियों का सामना करते हुए यह सुनिश्चित करता है कि राजकुमारी अपनी सामान्य स्थिति में वापस आ जाए।
200 साल पुराने ऐतिहासिक स्थल खजाना महल में 70 मिनट का लुभावना साउंड एंड लाइट शो का सजीव प्रदर्शन करने वाले अभिनेताओं और अत्याधुनिक डिजिटल कला का अनूठा उदाहरण है। इस तकनीक के साथ राज्य में प्रस्तुति का यह पहला अवसर है । नाटक के लिए खजाना महल के बैकड्रॉप में राजमहल का सैट लगाया गया है 95 से अधिक तरह की आधुनिक लाइटें और स्टीरियों साउंड सिस्टम के साथ नाटक का मंचन किया गया।
हाल ही में संगीत नाटक अकादमी की ओर से प्रकाश संयोजन के लिए रंगशिल्प पुरस्कार से सम्मानित ’शहजोर अली’ ने नाटक की लाइट डिजाइन की है। नाटक 1890 में राजस्थानी पृष्ठभूमि का है। आन बान शान की रक्षा के लिए राजपूतों का अंग्रेजों के साथ संघर्ष को नाटक में दिखाया गया है, ’कारवां-द मैजिकल मिस्ट्री’ नाटक में 45 से अधिक स्थानीय कलाकारों की टीम थी, जो राजस्थानी लोक कलाओं व संस्कृति की झलक प्रस्तुत करती दिखी। नाटक में लाइव घूमर, चिरमी, कालबेलिया नृत्य भी कहानी का हिस्सा रहे। नाटक में प्री-रिकॉर्डेड डायलॉग्स नाटक में सुनने को मिले। सैलानियों को जयपुर की नाइट लाइफ से रुबरू करवाने के उद्देश्य से म्यूजियम में नाटक का मंचन प्रतिदिन किया जाएगा। जाएगा।
नाटक के लिए अलग से टिकट का प्रावधान है, जिसमे केवल 100 लोग एक समय में शो देख सकेंगे। इसी टिकट पर सैलानी 7 एप्पल होटल में जलमहल के विहंगम व्यू के साथ डिनर का लुत्फ भी उठा सकेंगे।
मंच पर कलाकार
इसमें वरिष्ठ रंगकर्मी नरेन्द्र सिंह बबल, हेमंत सोनी, सिकंदर चैहान, किरन त्यागी, महेश चन्द महावर, प्रतीभा पारीक, संजय महावर, अंकित शर्मा, ओम सोनी, महेन्द्र शर्मा, सनी तंवर, रूबिना बानो, रामकेश मीना, राघव राजपूत, आलोक कुमावत, आधार कोठारी, विक्रम रावत, विक्रम मीना, मनीष मीना, मुकेश कुमार, राज सोलंकी, पूजा सपेरा, ममता सपेरा, दिलीप पानदार, दयाशंकर जांगिड और काजल सोलंकी मंच नजर नजर आए। इसकी कोरियोग्राफी प्रतिभा पारीक ने की है। म्यूजिक विकास योगी का रहा।

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