भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में व्याख्यान श्रृंखला का होगा आग़ाज़
अटल जी के व्यक्तित्व पर शोध कार्य को गति दी जाएगी-मुजीब आज़ाद
(रिर्पोटर:अशोक शर्मा)
टोंक। भारत के तीन बार प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर मौलाना आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान के पूर्व निदेशक मुजीब अता आजाद ने कहा है कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित वैचारिक व्याख्यान के आयोजन ऐतिहासिक संगठन तरुण शांति सेना के बैनर तले निरंतर आयोजित किए जाएंगे, जिसमें देश दुनिया के ख्याति नाम व्यक्तित्व भाग लेंगे। मुजीब आजाद ने कहा कि सोशल साइंस स्टडी के मध्य नजर अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व सूक्ष्मता से रिसर्च करने के लिए महत्वपूर्ण है, इन व्याख्यानों के माध्यम से होने वाले शोध पत्र वाचन को रिसर्च जनरल के रूप मे प्रकाशित किया जाएगा, जिससे शोधार्थियों को अपने शोध कार्यों में नई दिशा मिल सकेगी, शिक्षा के प्रत्येक क्षेत्र में गहनता से अध्ययन के लिए भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व एवं उनका जीवन चरित्र हमारे लिए अमूल्य धरोहर है। मुजीब आजाद ने बताया कि जयप्रकाश नारायण के जेपी आंदोलन के नजदीकी साथियों के सुझाव पर उन्होंने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है तथा जाने-माने विचारक प्रोफेसर रामजी सिंह की सरपरस्ती में यह वैचारिक व्याख्यान निरंतर जारी रखे जाएंगे, प्रोफेसर रामजी सिंह तरुण शांति सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, लोकनायक जयप्रकाश नारायण के बाद तरुण शांति सेना के अध्यक्ष का कार्यभार प्रोफेसर रामजी सिंह के पास है। मुजीब आजाद का कहना है कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 से उनका देहांत 16 अगस्त 2018 तक उनके जीवन काल में उनका लंबा सार्वजनिक जीवन छह दशकों का रहा। इस दौरान उनके सानिध्य में काम करने वाले अनेक क्षेत्रों के विलक्षण प्रतिभावान व्यक्तित्व देश दुनिया में मौजूद हैं, जिन्होंने अटल जी को नजदीक से देखा और समझा है, आज अटल जी के व्यक्तित्व पर देश दुनिया के अनेक विश्व विद्यालयों में छात्र रिसर्च कर रहे हैं, अटल जी के व्यक्तित्व पर लिखी गई पुस्तकों की संख्या हज़ारों में है, अनेक प्रकाशक तो ऐसे हैं, जो अटल जी के व्यक्तित्व के प्रकाशन में ही जुटे हैं। मुजीब आजाद ने कहा कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जैसे व्यक्तित्व हजारों साल और सदियों में जन्म लेते हैंए उनके जीवन के अध्ययन को लेकर वैचारिक कार्यक्रमों की महत्ता को दृष्टिगत रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। विदित रहे की मुजीब आजाद जेपी आंदोलन के अगुवा रहे प्रोफेसर राम जी सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर व जॉर्ज फर्नांडिस के निकटतम सहयोगी रहे हैं, प्रो. रामजी सिंह जेपी के बाद तरूण शांति सेना के अध्यक्ष बने और अभी 98 वर्ष की आयु में भी ऊर्जावान रहकर वैचारिक कार्यक्रमों में अपनी उपस्थित दर्ज कराते हैं, भारत के विश्वविद्यालयों में फिलासोफी विभाग (दर्शनशास्त्र) प्रोफेसर रामजी सिंह की ही देन हैं, पूर्व वाइस चांसलर प्रोफेसर रामजी सिंह सांसद रहे हैं और पद्मश्री से इन्हें नवाज़ा जा चुका है, आजाद के साथ अनेक बार राजस्थान तथा टोंक की धरती पर आ चुके हैं और उन्होंने यहां अपने व्याख्यानों से टोंक के प्रबुद्ध जनों को सम सामायिक् संदेश भी दिये हैं।

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