मौलाना अबुल कलाम आज़ाद अरबी फारसी शोध संस्थान के संस्थापक शौकत अली खान नहीं रहे
टोंक । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध ऐतिहासिक मौलाना अबुल कलाम आज़ाद अरबी फारसी शोध संस्थान के संस्थापक निदेशक कई भाषाओं के ज्ञाता, राष्ट्रपति अवार्ड साहिबज़ादा शौकत अली खान का रविवार को निधन हो गया, उनके निधन से टोंक सहित देश भर के लोग सदमे में हैं। साहिबज़ादा शौकत अली खान किसी पहचान के मोहताज नहीं, टोंक में उन्होंने टोंक इतिहास सम्बन्धित विभिन्न भाषाओं में, विभिन्न लेखकों द्वारा लिखित पुस्तकों, पांडुलिपियों को संग्रहित किया, ओर राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त कर विश्व स्तरीय शोध कार्य के लियें अरबी फारसी शोध संस्थान के संस्थापक निदेशक बने। 4 दिसम्बर 1978 से लगातार इस संस्थान को विश्व स्तर पर रिसर्च स्कॉलर्स के लियें महत्वपूर्ण साबित किया। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, साहित्यकार, फनकार, फि़ल्म अभिनेता हर वर्ग से जुड़े लोग यहां आकर शौकत साहब की पीठ थपथपाते रहे हैं, इनके इस कार्य के लिये भारत सरकार, राज्य सरकार सहित सैकड़ों संस्थाओं ने इन्हें राष्ट्रीय, राज्य, जि़ला स्तर के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा है। इनके सुपुत्र भी निदेशक रह चुके हैं। अरबी, फारसी, उर्दू, अंग्रेज़ी, हिंदी भाषा में साहिबज़ादा शौकत साहब ने महारत हासिल किये हुए थे, महाज्ञानी थे, ओर सेवानिवृत्ति के बाद सूफी संत के रूप में अपना जीवन यापन आम ज़रूरतमंद, प्रताडि़त लोगों के लिये अपने इल्म के ज़रिए मददगार बने हुए थे। टोंक में उनके रूहानी इलाज से कई मरीजों को शिफा भी मिलती रही है, उनके निधन पर टोंक ए राजस्थान पूरा देश स्तब्ध है। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद अरबी फारसी शोध संस्थान टोंक के निदेशक मुजीब आज़ाद, रॉयल फेमिली टोंक के चेयरमेन साहिबज़ादा मोहम्मद आहमद भय्यू, सेवानिवृत्त रिसर्च ऑफिसर अनवारुन्निसा नादिरा, ह्यूमन रिलीफ सोसायटी, तहरीक-ए-उर्दू राजस्थान के प्रदेश महासचिव एड. अख्तर खान अकेला, क्रिकेट कोच इम्तियाज़ अली सहित टोंक, राजस्थान के सभी लोगों ने शोकत अली खान के निधन पर शोक जताते हुए अपूरणीय क्षति बताया है।

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