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 दान में मिले अंगों को तय अवधि में जरूरतमंदों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकता है ड्रोन

दान में मिले अंगों को तय अवधि में जरूरतमंदों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकता है ड्रोन



ई दिल्ली। दान में मिले मानव अंगों को तय समय सीमा में जरूरतमंदों तक पहुंचाने में ड्रोन अहम साबित हो सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय इसके लिए ड्रोन के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल पर विचार कर रहा है। जल्द ही इसके लिए दिल्ली एम्स और उसके झझर सेंटर के बीच ड्रोन के इस्तेमाल का पायलट प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है।

मानव अंग ले जाने के लिए ग्रीन कोरिडोर और एंबुलेंस की जरूरत हो जाएगी खत्म

इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में ड्रोन के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की तैयारी में जुटी है और जल्द ही इसके लिए नया ड्रोन पालिसी जारी किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फिलहाल दान में मिले मानव अंगों को जरूरतमंदों तक पहुंचाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

इसके लिए एंबुलेंस का इस्तेमाल किया जाता है और स्थानीय पुलिस व प्रशासन की मदद से ग्रीन कोरोडोर बनाया जाता है। जाहिर है इस दौरान सभी ट्रैफिक रोक दिया जाता है। इसके बावजूद एंबुलेंस से अंग को तय सीमा के भीतर पहुंचाने की चुनौती बनी रहती है। लेकिन ड्रोन इन सारी समस्याओं का समाधान हो सकता है। लेकिन इसके लिए ड्रोन को विशेष उपकरणों से लैस करना होगा। साथ ही अंग प्रत्यारोपण की सुविधा वाले सभी अस्पतालों को ड्रोन से जोड़ना होगा

विशेष सावधानी की पड़ेगी जरूरत

वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कोरोना काल में ड्रोन से दवाओं की डिलिवरी का प्रयोग काफी सफल रहा। लेकिन लंबी दूरी तक मानव अंगों को ले जाने के लिए विशेष सावधानी की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों ऋषिकेश एम्स से टिहरी में एक अस्पताल में टीबी की दवाओं की डिलिवरी इसी प्रयोग का हिस्सा है। अब दिल्ली एम्स और झझर कैंपस के बीच पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।

लाने-ले-जाने लायक ड्रोन की तैनाती

इस पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों के आधार पर भविष्य में ड्रोन के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की योजना बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए शहरों के बड़े अस्पतालों के साथ ही जिलों के अस्पतालों में भी मानव अंग को लाने-ले-जाने लायक ड्रोन की तैनाती होगी। उन्होंने कहा कि सरकार अंग प्रत्यारोपण की समस्याओं को दूर करने की कोशिश कर रही है। इसी तरह से 65 साल से अधिक उम्र के बुर्जुर्गों के लिए अंग प्रत्यारोपण के लिए पंजीकरण कराने की छूट दी गई है

10 हजार रुपये की ली जाती थी फीस

इसके साथ ही अंग प्रत्यारोपण के लिए पंजीकरण के लिए कुछ राज्यों में अधिवासी होने की शर्तों को खत्म कर दिया गया है। अब किसी भी राज्य का जरूरतमंद व्यक्ति अंग हासिल करने के लिए किसी भी राज्य में पंजीकरण करा सकता है। कुछ राज्यों में पंजीकरण के लिए पांच से 10 हजार रुपये की फीस ली जाती थी, उसे भी खत्म कर दिया गया है।

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