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अक्षय तृतीया पर मनाते शोक, मंदिर से उतार देते घंटियां

अक्षय तृतीया पर मनाते शोक, मंदिर से उतार देते घंटियां

 



 इस दिन बिछड़ गए थे दूल्हा-दुल्हन, 18 गांव में नहीं बजेगी शहनाई

सवाई माधोपुर | अक्षय तृतीया पर देशभर में अबूझ सावे पर मांगलिक काम होते है। अबूझ सावा होने के कारण शादियां भी बहुत होती है लेकिन सवाई माधोपुर के चैथ का बरवाड़ा में इस दिन शोक मनाया जाता है। पिछले चार सौ साल से लगातार ऐसा हो रहा है। चैथ का बरवाड़ा सहित 18 गांवों पर शहनाई नहीं बजती है। चैथ मंदिर से घंटियों को भी उतार दिया जाता है।

चैथ का बरवाड़ा सहित आसपास के 18 गांव में आज अक्षय तृतीया पर न तो कोई शादी विवाह होगा और न ही कोई मांगलिक काम। मंदिर में भी भक्तों की भीड़ नहीं रहेगी। साथ ही कोई माता मंदिर की घंटी नहीं बजा दे। ऐसे में चैथ माता ट्रस्ट ने मंदिर में लगी सभी घंटियों को हटा दिया गया है। इसके साथ ही लाउड स्पीकर में होने वाली आरती भी आज नहीं होगी। दोपहर एवं शाम की आरती भी मन में ही बोली जाएगी।

बिछड़ गए थे दूल्हा-दुल्हन

चैथ का बरवाड़ा स्थित चैथ माता मंदिर में सोहलवीं शताब्दी के आस-पास अक्षय तृतीया के दिन बड़ी संख्या में नव-विवाहित जोड़ों की जान चली गई थी। घटना को लेकर अलग-अलग लोक कथा हैं।

मंदिर के पुजारी शंकर लाल सैनी का कहना है कि अक्षय तृतीया पर चैथ माता मंदिर में दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में नवविवाहित जोड़े आए थे। ऐसे में कुछ विवाहित जोड़ों की दुल्हन आपस में बिछड़ गई और बाद में विवाद होने से कई नव-विवाहित जोड़ों की जान चली गई।

18 गांव में नहीं होते मांगलिक काम

रिटायर्ड वरिष्ठ हिंदी व्याख्याता व इतिहासकार शरीफ अहमद ने बताया कि किवदंती के अनुसार चैथ माता मंदिर में इस दिन बड़ी संख्या में नव-विवाहित जोड़े आए थे। ऐसे में छेड़छाड़ की घटना के बाद यहां नरसंहार होने की बात कही जाती है। इसके साथ ही कुछ डाकुओं के आक्रमण करने पर बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की जानकारी भी मिली है। उन्होंने बताया कि इतना तय है कि इस दिन बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गई थी। यहां के राजा ने चैथ का बरवाड़ा और उसके ठिकाने के अंतर्गत आने वाले 18 गांव में अक्षय तृतीया के दिन मांगलिक कार्य नहीं करने और शोक मनाने की बात कही। जिसे लोग आज तक मान रहे हैं।

माता मंदिर में बांधी गई घंटियां, घरों में नहीं बनेगी सब्जी

अक्षय तृतीया के दिन शोक मनाने की परंपरा सालों बाद भी जारी है। चैथ माता मंदिर पुजारी शंकर लाल सैनी ने बताया कि इस दिन माता मंदिर में घंटा बांध दी जाएगी ताकि कोई भी लोग उसे बजा नहीं पाए। इसके साथ ही आरती मन के अंदर बोली जाएगी तथा लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं होगा। घरों में सब्जियां भी नहीं बनाई जाएगी तथा कढ़ाई भी नहीं चलेगी। किसी को सब्जी खानी होगी तो वह 1 दिन पहले ही सब्जी बना कर रख लेगा। माता मंदिर में बहुत कम लोग इस दिन आते हैं।


आज भी बने हैं स्मारक

इस दुखद घटना में जो लोग मारे गए थे। उनके स्मारक आज भी चैथ माता खातालाब मेला मैदान तथा चैथ माता पहाड़ियों के नीचे स्थित वन क्षेत्र में बने हुए हैं। यह स्मारक लोगों को उस दिन की घटनाओं की याद दिलाते हैं।

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