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बद्रीनाथ मंदिर के शिखर पर बैठी चिड़िया, होगा सुकाल

बद्रीनाथ मंदिर के शिखर पर बैठी चिड़िया, होगा सुकाल



 ध्वजा चढ़ाने के 30 मिनट में आई खुशहाली की प्रतीक चिड़िया, अच्छी होगी फसलें

टोंक | इस साल टोंक जिले ही नहीं, प्रदेशभर में सुकाल होगा। प्रदेश में खुशहाली आएगी और फसलें भी अच्छी होगी। इसका संकेत मिला है अक्षय तृतीया पर नटवाड़ा स्थित बद्रीनाथ मंदिर के शिखर पर पहराए गए ध्वजा पर चिड़िया बैठने से। परंपरा अनुसार आज से शुरू हुए 3 दिवसीय वार्षिक मेले के दौरान मंदिर के शिखर पर चढ़ाई गई ध्वजा पर आधा घंटा में ही चिड़िया बैठ गई। इसके साथ ही लोग खुशी से झूम से उठे और भगवान बद्रीनाथ के जयकारे लगाने लगे।

सरपंच नीता कंवर ने बताया कि सालों से चली आ रही परम्परा के अनुसार मंगलवार सुबह नटवाड़ा ठिकाने के गढ़ में ठाकुर लक्ष्मण करण राठौड़ के बड़े बेटे कुंवर पुण्य प्रताप करण और भंकेशव देव के सानिध्य में विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ अनाज और ध्वजा का पूजन किया गया। इसके बाद बैंड-बाजे, झालर, शंख और नगाड़ों के साथ श्री बद्री विशाल भगवान के जयकारों के साथ शोभा यात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा में महिलाओं ने मंगल गीत गाए। शोभा यात्रा गढ़ से शुरू होकर सीतारामजी से होते हुई मुख्य बाजार, हताया मोहल्ला, जाटों के मोहल्ले से होते हुए श्री बद्री विशाल के मंदिर पहुंची। यहां ध्वजा को भगवान के चरणों में अर्पित कर पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर गांव के पंच-पटेलों के सानिध्य में मंदिर के शिखर पर ध्वजा फहराई गई। इसके बाद मंदिर के शिखर पर बैठने वाले पक्षी का शगुन देखा गया। करीब 30 मिनट बाद चिड़िया मंदिर के शिखर पर बैठी तो लोग खुशी झूम से उठे। ग्रामीणों ने भी घरों में पकवान बनाकर दाल-पतासों के साथ भगवान को भोग लगााकर शुभकामनाएं दी। नटवाड़ा सहित पराना, शुक्लपुरा, देवली, गोपालपुरा, मण्डावर, वजीराबाद, खलीलाबाद, हनीफनुर सहित आसपास के गांवों के श्रद्वालुओ ने भगवान श्री बद्रीनाथ के मंदिर में माथा टेक मनौतियां मांगी।

सुण ली म्हारा बद्रीनाथ ने

नटवाड़ा में श्री बद्री विशाल भगवान के मंदिर में अक्षय तृतीया के अवसर पर ध्वजा फहराने के बाद चारों तरफ सन्नाटा छा गया। सबकी नजरें मंदिर के शिखर पर फहराई गई ध्वजा पर थी। लोग इस ध्वजा पर बैठने वाले प्रथम पक्षी के इंतजार में टकटकी लगाए बैठे रहे। लोगों ने करीब 8.15 बजे मंदिर के शिखर पर ध्वजा पहनाई और 30 मिनट बाद सुकाल की प्रतीक चिड़िया आकर बैठ गई। इसके साथ चारों ओर एक ही आवाज गूंज उठी सुण ली म्हारा बद्रीनाथ ने। इसी के साथ लोगों के चहेरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर के शिखर पर चिड़िया का बैठना शुभ माना जाता है एवं दिवानखाने में ध्वजा फहराने के बाद ज्वार, मूंगफली, मूंग एवं तिल सहित 4 अनाजों की ढेरियां बिखरी मिली, जिससे खरीफ और रबी की फसलें अच्छी होने के उम्मीद है।


कौआ है अकाल का प्रतीक

शिखर पर बैठने वाले पक्षी में गरूड़, तोता, गुरगल पक्षी एवं चिड़िया सुकाल का प्रतीक है, जबकि कौआ अकाल का प्रतीक है यानी कौआ ध्वजा पर बैठ गया तो जिला समेत प्रदेश में अकाल पड़ेगा।


भगवा रंग में रंगी सड़कें

अक्षय तृतीया के अवसर पर निकाली गई शोभायात्रा का कई सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इससे सड़कों पर फूलों की पत्तियों की परत जम गई और सड़कें भगवा रंग में रंगी नजर आने लगी। इस दौरान चारों तरफ श्री बद्रीनाथ एवं सनातन धर्म के जयकारे गूंज उठे। इस दौरान आसपास के गांवों से कई पदयात्राएं आई। ध्वजा फहराने के बाद भगवान श्री बद्री विशाल को पोशाक चढ़ाने वालों की होड़ लग गई।


2008 में बैठा था कौआ, पड़ा था अकाल

लोगों ने बताया कि 1100 सालों से चली आ रही इस परंपरा के दौरान 2008 में इस मंदिर के शिखर पर तोता, चिड़िया के बजाय कौआ आ बैठा। उस समय पंच पटेलों ने अकाल बताया था और संयोगवश उस साल प्रदेश में अकाल पड़ा।


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