अंतिम-संस्कार करना बना चुनौती
बारिश में कई दिनों तक घर पर ही शव रखने को मजबूर; श्मशान की भूमि मांग रहे ग्रामीण
कोटा | कोटा में दीगोद तहसील से 6 किमी दूर है सुल्तानपुर पंचायत समिति जिससे 25 किमी दूर स्थित है भगवानपुरा गांव। यह गांव अपने एक वीडियो के चलते चर्चा में है। गांव के लोगों को खेतों के बीच से गुजर रहे नाले को पार कर दाह संस्कार के लिए जाना पड़ता है। यहां कोई श्मशान घाट नहीं है बल्कि गांव के बाहर की कच्ची जमीन पर ही दाह संस्कार कर दिया जाता है। गांव में ना तो श्मशान है ना ही श्मशान तक जाने का रास्ता।
गांव के लोग सर्दी, गर्मी, बरसात के मौसम में खुले आसमान के नीचे दाह संस्कार करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों को दाह संस्कार के लिए करीब डेढ़ किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। उसमें भी पानी से भरे नाले को पार करना पड़ता है। भगवानपुरा गांव में करीब 150 परिवार रहते हैं। जिनकी आबादी 700 के करीब है। इसमें 400 मतदाता है।
बारिश में कई दिनों तक शव घर में रखने को मजबूर
रविवार को गांव में 80 साल की सवरणी बाई की अचानक मौत होने के कारण जब शव यात्रा को ले जाया गया। तो रास्ता नहीं होने के कारण मजबूरी में लोगों को पानी से भरे नाले से होकर गुजरना पड़ा। भगवानपुर में श्मशान के लिए जमीन आवंटित नहीं होने के कारण लोगों को कच्ची जगह पर अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। यहां बारिश के समय काफी समस्या खड़ी हो जाती है।
बरसात में ना रास्ता होता है और ना ही कोई व्यवस्था। ऐसे में कई बार बारिश की वजह से शव को घंटों तक घर में रखना पड़ता है।
ग्रामीणों की कोई सुनवाई नहीं
भगवानपुरा निवासी सुरेश मीना ने बताया कि कोटसुआ पंचायत के भगवानपुरा गांव के ग्रामीण अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर काटकर थक गए है। पंचायत से लेकर कलेक्टर तक को लिखित में शिकायत देकर श्मशान के लिए जगह आवंटित करने और रास्ता बनाए जाने की मांग की। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
जिम्मेदार बोले- प्रस्ताव भेजा हुआ है
इस संबंध में ग्राम पंचायत कोटसुआ के ग्राम विकास अधिकारी सुरेश गोस्वामी ने बताया हमने श्मशान के लिए उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव बनाकर भेज रखा है। हमारे यहां से कोई काम पेंडिंग नहीं है।
एसडीएम ने कहा- प्रयास करेंगे
दीगोद एसडीएम दिनेश मीणा का कहना है कि मैंने अभी नया ज्वाइन किया है। मामले की जानकारी लेकर जमीन आवंटित कराने का प्रयास किया जाएगा।

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