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चीन ने अरुणाचल, अक्साई चिन को अपना हिस्सा बताया-:बोले- चाइना की पुरानी आदत, पहले भी नक्शे निकाले, उनके दावों से कुछ नहीं होता

चीन ने अरुणाचल, अक्साई चिन को अपना हिस्सा बताया-:बोले- चाइना की पुरानी आदत, पहले भी नक्शे निकाले, उनके दावों से कुछ नहीं होता

 



विदेश | चीन ने सोमवार (28 अगस्त) को अपना ऑफिशियल मैप जारी किया है। इसमें भारत के अरुणाचल प्रदेश, अक्साई चीन, ताइवान और विवादित दक्षिण चीन सागर को अपने क्षेत्र में दिखाया है। चीन के सरकारी न्यूज पेपर ने एक्स (पहले ट्विटर) पर दोपहर 3:47 बजे नया मैप पोस्ट किया। इस पर भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि चीन की पुरानी आदत है। उनके दावों से कुछ नहीं होता।


नेचुरल रिर्सोसेस मिनिस्ट्री की ओर से होस्ट की जाने वाली स्टैंडर्ड मैप सर्विस की वेबसाइट पर भी नया मैप लॉन्च किया गया है। यह मैप चीन और दुनिया के विभिन्न देशों की सीमाओं की ड्रॉइंग पद्धति के आधार पर तैयार किया गया है।


विदेश मंत्री बोले- चीन पहले भी ऐसे दावे करता रहा है


एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में विदेश मंत्री जयशंकर भारत के इलाकों को अपना बताने के चीन के दावे को सिरे से
खारिज कर दिया। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा- चीन ने नक्शे में जिन इलाकों को अपना बताया है, वो उनके नहीं हैं। ऐसा करना चीन की पुरानी आदत है। अक्साई चिन और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है। पहले भी चीन भारत के हिस्सों के लेकर नक्शे निकालता रहा है। उसके दावों से कुछ नहीं होता। हमारी सरकार का रुख साफ है। बेकार के दावों से ऐसा नहीं हो जाता कि किसी और के इलाके आपके हो जाएंगे।

संजय राउत बोले- चीन पर सर्जिकल स्ट्राइक करे सरकार


चीन के इस दावे के बाद शिवसेना उद्धव गुट के सांसद संजय राउत बोले- कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में कहा था कि लद्दाख के पैंगोंग घाटी में चीन ने घुसपैठ की है। मतलब राहुल गांधी ने लद्दाख दौरे पर चीन को लेकर जो बातें कही थीं, वो सही हैं।


राउत ने कहा- हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लिया और शी जिनपिंग को बधाई दी थी। उसके बाद चीन का ये नक्शा आता है। अगर केंद्र सरकार में हिम्मत है तो वह चीन पर सर्जिकल स्ट्राइक करे।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा- चीन का दावा बेतुका

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चीन के दावे को बेतुका बताया है। तिवारी ने कहा- चीनी मैप मानक मानचित्र नहीं हैं। ये चीन-भारत सीमा विवाद के इतिहास से मेल नहीं खाते। ऐसे में चीन का दावा बेतुका है। आज असली मुद्दा यह है चीनियों ने थिएटर स्तर पर कई बिंदुओं पर वास्तविक नियंत्रण रेखा का उल्लंघन किया है।


तिवारी ने कहा- सितंबर में होने वाले G20 मीटिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आ रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में सरकार को गंभीरता से आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि क्या जिनपिंग की मेजबानी करना भारत के स्वाभिमान के अनुरूप होगा।


चीन ने एलएसी के साथ 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर रखा है, जिसे खाली करने की जरूरत है। संक्षेप में कहें तो, चीनी मानचित्र बेतुके हैं, वे चीन के इतिहास के साथ मेल नहीं खाते हैं।


चीन ने अप्रैल में अरुणाचल के 11 जगहों के नाम बदले थे

इससे पहले चीन ने अप्रैल 2023 में अपने नक्शे में अरुणाचल प्रदेश की 11 जगहों के नाम बदल दिए थे। चीन ने पिछले 5 साल में तीसरी बार ऐसा किया है। इसके पहले 2021 में चीन ने 15 जगहों और 2017 में 6 जगहों के नाम बदले थे।


भारत ने कहा था- नाम बदलने से हकीकत नहीं बदल जाएगी

भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन की इस हरकत पर पलटवार किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था- हमारे सामने चीन की इस तरह की हरकतों की रिपोर्ट्स पहले भी आई हैं। हम इन नए नामों को सिरे से खारिज करते हैं। अरुणाचल प्रदेश भारत का आतंरिक हिस्सा था, हिस्सा है और रहेगा। इस तरह से नाम बदलने से हकीकत नहीं बदलेगी

अरुणाचल की राजधानी ईटानगर के नजदीकी इलाके का नाम भी बदला

चीन ने कभी अरुणाचल प्रदेश को भारत के राज्य के तौर पर मान्यता नहीं दी। वो अरुणाचल को ‘दक्षिणी तिब्बत’ का हिस्सा बताता है। उसका आरोप है कि भारत ने उसके तिब्बती इलाके पर कब्जा करके उसे अरुणाचल प्रदेश बना दिया है।


चीन के सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' के मुताबिक सोमवार को चीन की सिविल अफेयर मिनिस्ट्री ने 11 नाम बदले जाने को मंजूरी दे दी। यह सभी इलाके जेंगनेन (चीन के दक्षिण राज्य शिजियांग का हिस्सा) में आते हैं। इनमें से 4 रिहायशी इलाके हैं। इनमें से एक इलाका अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के बेहद करीब है। 5 पहाड़ी क्षेत्र और दो नदियां हैं। चीन ने इन इलाकों के नाम मन्दारिन और तिब्बती भाषा में रखे हैं।

नाम बदलने के पीछे चीन का क्या दावा है?

2021 में चीन ने अरूणाचल प्रदेश की 15 जगहों के नाम बदले थे। इनमें से 8 रिहायशी इलाके थे, 4 पर्वत, 2 नदियां और एक पहाड़ों से निकलने वाला रास्ता था। चीन अरुणाचल के इलाकों के नाम क्यों बदलता है इसका अंदाजा वहां के एक रिसर्चर के बयान से लगाया जा सकता है।


2015 में चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंस के रिसर्चर झांग योंगपान ने ग्लोबल टाइम्स को कहा था, 'जिन जगहों के नाम बदले गए हैं वो कई सौ सालों से हैं। चीन का इन जगहों का नाम बदलना बिल्कुल जायज है। पुराने समय में जेंगनेन (चीन में अरुणाचल को दिया नाम) के इलाकों के नाम केंद्रीय या स्थानीय सरकारें ही रखती थीं। इसके अलावा इलाके के जातीय समुदाय जैसे तिब्बती, लाहोबा, मोंबा भी अपने अनुसार जगहों के नाम बदलते रहते थे।


जब जैंगनेम पर भारत ने गैर कानूनी तरीके से कब्जा जमाया तो वहां की सरकार ने गैर कानूनी तरीकों से जगहों के नाम भी बदल दिए।'झांग ने ये भी कहा था कि अरुणाचल के इलाकों के नाम बदलने का हक केवल चीन को होना चाहिए।


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