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  उपलब्धता होने पर भी त्याग करना सच्चा त्याग – आचार्य महाश्रमण

उपलब्धता होने पर भी त्याग करना सच्चा त्याग – आचार्य महाश्रमण



पारमार्थिक शिक्षण संस्था का प्रथम अधिवेशन आयोजित

 मुंबई (महाराष्ट्र) | युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के पावन सान्निध्य में आज पारमार्थिक शिक्षण संस्था का प्रथम अधिवेशन आयोजित हुआ। लाडनूं जैन विश्व भारती में स्थापित पारमार्थिक शिक्षण संस्था एक आध्यात्मिक संस्था है। जिसमें दीक्षा हेतु अग्रसर मुमुक्षुओं के शिक्षण, प्रशिक्षण का क्रम चलता है। गुरुदेव के सान्निध्य में इस प्रथम अधिवेशन का प्रवास व्यवस्था समिति के अयोजकत्व में आयोजन किया गया। 


आचार्य श्री ने मंगल प्रवचन में कहा कि वह त्यागी नहीं होता जो नहीं मिलने पर या उपलब्ध न होने पर उसे त्याग दें बल्कि त्यागी वह होता है जो वस्तु के उपलब्ध होने पर व उसके सामने आने पर भी वैराग्य भाव से उसका त्याग कर दे। अनंत काल की इस यात्रा में वह दिन धन्य है जिस दिन व्यक्ति भोग से त्याग के पथ की ओर अगसर होता है और आगे त्याग का जीवन जीने का लक्ष्य बनाता है। पारमार्थिक शिक्षण संस्था में शिक्षा के साथ परीक्षा, समीक्षा व उसके बाद दीक्षा होती है। इस संस्था का जन्म विसं. २००५ में आचार्य तुलसी के समय हुआ व आज पचहतर साल पूरे हो रहे हैं। पचहतर साल बाद यह प्रथम अधिवेशन हो रहा है। 


गुरुदेव ने आगे फरमाया– एक समय था जब महिलाऐं सभाओं में बोल भी नहीं पाती, पर आज कितना परिष्कार और परिवर्तन हो गया है। यह सारा प्रशिक्षण का प्रभाव है की वे प्रशिक्षित हो गई है व प्रभावक प्रस्तुतियां देने में सक्षम बन गई हैं। कुछ बादल गरजते नहीं, पर बरसते है। यह ऐसी संस्था है। यह संस्था मुख्यतः परमार्थ के शिक्षण से सम्बन्धित है। यह सौभाग्यशाली संस्था है जिसमें साधना और संस्कार का विकास होता है। इसमें विकास का क्रम बना रहे तथा गुणवत्ता का भी विकास होता रहे। आज की भावी पीढ़ी ही वर्तमान बनकर हमारे सामने आएगी।


तत्पश्चात कार्यक्रम में मुख्यमुनि महावीर कुमार जी, साध्वी प्रमुखाश्री विश्रुतविभा जी, साध्वीवर्या संबुद्धयशा जी ने सारगर्भित उद्बोधन प्रदान किया। समणी नियोजिका अमलप्रज्ञा जी, समणी ऋजुप्रज्ञा जी ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति दी। 

इस अवसर पर प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष श्री मदन तातेड, पारमार्थिक शिक्षण संस्था के अध्यक्ष श्री बजरंग जैन, मुमुक्षु मानवी, मुमुक्षु भावी गादिया ने विचार रखे। संस्था के पदाधिकारियों द्वारा ‘अरुणिमा’ पत्रिका गुरु चरणों में भेंट की। डॉक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया। मुमुक्षु बहनों ने सामूहिक गीत का संगान किया। 

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