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   'हम नहीं चाहते सुप्रीम कोर्ट तारीख पर तारीख अदालत बने', वकीलों की सुनवाई स्थगित करने की मांग पर CJI ने जताई चिंता

'हम नहीं चाहते सुप्रीम कोर्ट तारीख पर तारीख अदालत बने', वकीलों की सुनवाई स्थगित करने की मांग पर CJI ने जताई चिंता



भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने वकीलों द्वारा केस के स्थगन की बढ़ती मांग पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि सितंबर और अक्टूबर दो महीनों में 3688 स्थगन पर्चियां कोर्ट को दी गईं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने वकीलों से अनुरोध किया कि जब तक वास्तव में बहुत जरूरी न हो वे केस को स्थगित करने की मांग न करें। केस स्थगन से शीघ्र सुनवाई का उद्देश्य निष्फल होता है।

नई दिल्ली। भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने वकीलों द्वारा केस के स्थगन की बढ़ती मांग पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि सितंबर और अक्टूबर दो महीनों में 3688 स्थगन पर्चियां कोर्ट को दी गईं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने वकीलों से अनुरोध किया कि जब तक वास्तव में बहुत जरूरी न हो वे केस को स्थगित करने की मांग न करें। केस स्थगन से शीघ्र सुनवाई का उद्देश्य निष्फल होता है।चीफ जस्टिस ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट को तारीख पर तारीख की अदालत नहीं बनाना चाहते। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार (3 नवंबर) को जैसे ही मुकदमों की सुनवाई के लिए अदालत बैठी वकीलों द्वारा सुनवाई स्थगित करने के लिए दी जाने वाली स्थगन पत्रों का जिक्र किया। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वह केस के दाखिल होने से लेकर पहली बार सुनवाई पर लगने तक की निगरानी कर रहे हैं , मुकदमे का समय घटा है।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सहयोग के बगैर संभव नहीं

चीफ जस्टिस ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन के सहयोग के बगैर संभव नहीं था। लेकिन इसके साथ ही चीफ जस्टिस ने वकीलों की ओर से बढ़ती स्थगन मांग का मुद्दा उठाया और इस पर चिंता जताई। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आज भी 178 पर्चियां सुनवाई स्थगन की हैं। प्रत्येक मिसलेनियस डे पर औसतन 154 स्थगन पर्चियां सर्कुलेट हुईं।

सितंबर-अक्टूबर में कुल 3688 स्थगन पर्चियां आयीं

उन्होंने कहा कि दो महीने सितंबर और अक्टूबर में कुल 3688 स्थगन पर्चियां आयीं। कोर्ट ने अत्यधिक स्थगनों पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे केस को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने और केस दाखिल करने का उद्देश्य निष्फल होता है। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार, मंगलवार और शुक्रवार सामान्य तौर पर मिसलेनियस दिन होते हैं, जिन दिनों नये मामलों की सुनवाई रेगुलर डे यानी नियमित सुनवाई के दिन कहा जाता है जब नियमित मुकदमों की मेरिट पर सुनवाई होती है।

सितंबर से 2361 मामलों को जल्दी सुनवाई के लिए मेंशन

चीफ जस्टिस ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि दूसरी ओर देखा जाए तो सितंबर से अभी तक 2361 मामलों को जल्दी सुनवाई के लिए मेंशन किया गया। रोजाना औसतन 59 केस जल्दी सुनवाई की मांग के लिए कोर्ट में मेंशन किये जाते हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि एक तरफ तो शीघ्रता के आधार पर केस सुनवाई पर लगाने के लिए मेंशन किये जाते हैं और दूसरी ओर जब वे सुनवाई के लिए लगते हैं तो स्थगन मांग लिया जाता है।

अदालत तारीख पर तारीख की अदालत नहीं बन सकती

चीफ जस्टिस ने कहा कि वह वकीलों से अनुरोध करते हैं कि जबतक वास्तव में बहुत जरूरी न हो वे केस को स्थगित करने की मांग न करें। यह अदालत तारीख पर तारीख की अदालत नहीं बन सकती। इससे नागरिकों का कोर्ट में भरोसा कम होता है। चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में वकील पत्र देकर (लैटर सर्कुलेट) केस को स्थगित करने की मांग करते हैं।

हाई कोर्ट में ऐसा नहीं होता

यहां ऐसा होता है लेकिन हाई कोर्ट में ऐसा नहीं है। वहां जब केस पर सुनवाई का नंबर आता है तभी वकील जज से केस स्थगित करने का अनुरोध कर सकता है और यह जज के विवेकाधिकार पर है कि वह केस का स्थगन देते हैं कि नहीं। कोर्ट में सुनवाई की तारीखें लगने पर आम जुमला है तारीख पर तारीख। सनी देओल की फिल्म दामिनी का तारीख पर तारीख का डायलाग बहुत प्रसिद्ध हुआ था। वैसे भी देश की अदालतों में करीब पांच करोड़ मुकदमे लंबित हैं जिन्हें निबटाना न्यायपालिका के लिए एक बड़ी चुनौती है। मामलों की सुनवाई में देरी का स्थगन एक बड़ा कारण है।

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