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 आर्यिका स्वस्ति भूषण का 28 वां दीक्षा दिवस मनाया

आर्यिका स्वस्ति भूषण का 28 वां दीक्षा दिवस मनाया



  • आर्यिका स्वस्ति भूषण की पूजा कर अध्र्य समर्पित किये
  • धर्म की राह पर चलकर संगीता से स्वस्ति भूषण बनी
टोंक। आदिनाथ शुभकामना परिवार पुरानी टोंक द्वारा रविवार को माघ शुक्ल द्वितीया को जैन भवन पुरानी टोंक मे आर्यिका स्वस्ति भूषण का 28 वां दीक्षा दिवस मनाया गया।  संयोजक मधु लुहाडिय़ा ने बताया कि कार्यक्रम में सर्वप्रथम आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन किया गया। संतरा सोनी, मंजू सोनी एवं सोनिया जैन ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया, उपस्थित श्रद्धालुओं द्वारा आर्यिका स्वस्ति भूषण की पूजा कर अध्र्य एवं श्रीफल समर्पित किए गए, महिलाओं ने आर्यिका की भक्ति में विनतीयां गाई । मंगल गीत एवं भजन गाते हुए भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया, दीप प्रज्जवलन कर ऋद्धि मंत्रों के उच्चारण के साथ भक्तामर का पाठ एवं णमोकार महामंत्र का जाप किया गया एवं आर्यिका स्वस्ति भूषण के 28 वें दीक्षा दिवस महोत्सव के अवसर पर घी के 28 दीपक जलाकर आरती की गई । इस अवसर पर  संतरा, मंजू, चंद्रकला, उषा, इंदिरा, अनीता,  संजू, सारिका, सोनिया,  मधु एवं सीमा आदि मौजूद थी। संजू सोनी एवं कम्मो रानी जैन ने आर्यिका स्वस्ति भूषण के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आर्यिका स्वस्ति भूषण का जन्म 1 नवंबर 1969 को छिंद वेव शिवनी में हुआ, आर्यिका के पिता का नाम मोतीलाल एवं माता का नाम पुष्पा जैन है। आर्यिका का बचपन का नाम संगीता रखा गया, संगीता ने संस्कृत से एम ए कर उच्च शिक्षा प्राप्त की, पंचम पट्टाचार्य सिंहरथ प्रवर्तक विद्याभूषण सन्मति सागर  महाराज से माघ शुक्ल द्वितीया 24 जनवरी 1996 को कटनी मध्य प्रदेश में आर्यिका दीक्षा ग्रहण कर आर्यिका स्वस्ति भूषण का पद प्राप्त किया । आर्यिका ने शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर जी की लगातार 121 वंदना कर एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। साहित्य रचना, काव्य, पूजन, गद्य संग्रह सभी को समन्वित कर 100 से भी अधिक कृतियों का प्रकाशन किया,  जिनपाद पुजांजली संपूर्ण जैन पूजा, पाठ, विधान, आरती, चालीसा स्त्रोत का आर्यिका द्वारा सरल भाषा में अनुवाद किया गया आर्यिका द्वारा अब तक 300 से भी अधिक शुभकामना परिवार का गठन किया जा चुका है। आर्यिका द्वारा भारत की कई जेलों में कैदियों के जीवन परिवर्तन वाला प्रवचन दिया जा चुका है। आर्यिका द्वारा जहाजपुर में भूगर्भ से प्रगटित अतिशयकारी मुनीसुव्रतनाथ भगवान का विश्व का सबसे बड़ा जहाज के आकार का मंदिर का निर्माण करवाया गया, जिसे ‘‘स्वस्ति धाम’’ नाम से अलंकृत किया गया, जहां फरवरी 2020 में पंचकल्याणक का आयोजन कर सूर्य मंत्र देकर मूर्तियों को मंदिर में प्रतिष्ठित किया गया। आर्यिका स्वस्ति भूषण विगत 28 वर्षों से समाज में अपने प्रवचनों के माध्यम से धर्म की गंगा बहा रही है, इनका वर्ष 2023 का चातुर्मास सिद्ध क्षेत्र सोनागिरी में संपन्न हुआ | 

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