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  अजमेर के सुभाष बाग की स्ट्रीट लाइट में पढ़कर विधानसभा अध्यक्ष के पद तक पहुंचा हूं.....देवनानी

अजमेर के सुभाष बाग की स्ट्रीट लाइट में पढ़कर विधानसभा अध्यक्ष के पद तक पहुंचा हूं.....देवनानी


  • विधानसभा की कमेटियों को प्रभावी बनवाऊंगा ताकि अफसरों पर नियंत्रण हो। कांग्रेस के शासन में पांच हजार सवालों के जवाब विधायकों को नहीं मिले......
  • भूपेंद्र यादव, गजेंद्र सिंह शेखावत, सीपी जोशी, कालीचरण सराफ आदि को मैंने यूनिवर्सिटी छात्रसंघ का चुनाव लड़वाया
  • अजमेर में सेवन वंडर की इमारतों को बचाने से पहले आनासागर को बचाने की जरूरत  है
  • फर्स्ट इंडिया न्यूज चैनल के एडिटर पवन अरोड़ा के सवालों पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने महत्वपूर्ण जानकारियां दी

(एस.पी.मित्तल)

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अजमेर | 9 फरवरी को सायं साढ़े सात बजे फर्स्ट इंडिया न्यूज़ चैनल पर राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का एक संजीदा इंटरव्यू प्रसारित हुआ। चैनल के सीईओ और मैनेजिंग एडिटर पवन अरोडा के सवालों पर देवनानी ने महत्वपूर्ण जानकारियां दी। ये जानकारियां विधानसभा से लेकर देवनानी की राजनीतिक सक्रियता और अजमेर उत्तर विधानसभा से जुड़ी हुई है। देवनानी  ने अपने अभाव वाले जीवन की जानकारियां भी दी। देवनानी ने कहा कि विधानसभा में विभिन्न कमेटियों का कार्य महत्वपूर्ण होता है। यदि कमेटियां प्रभावी और नियमित तरीके से काम करें तो इसका फायदा सरकार को भी मिलता है। उनका प्रयास होगा कि कमेटियों को प्रभावी बनाया जाए ताकि अधिकारियों पर भी नियंत्रण हो सके। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि गत कांग्रेस के शासन में पांच हजार सवालों के जवाब विधायकों को नहीं मिले। देवनानी ने कहा कि उनका प्रयास होगा कि पूर्व सवालों के जवाब विधायकों को मिल जाएं। उन्होंने बताया कि इस बार कमेटियां का गठन विधायकों की रुचि के अनुरूप होगा। मैंने सभी विधायकों से कहा है कि वे अपनी-अपनी रुचि की कमेटियों के बारे में बताएं। विधायकों की जानकारी मिलने के बाद कमेटियों का गठन कर दिया जाएगा। देवनानी ने कहा कि वे विधानसभा की आर्थिक स्वायत्तता के पक्षधर हैं। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वित्त विभाग के अधिकारियों से संवाद भी किया है। देवनानी ने कहा कि विधानसभा भवन में ऊपर एक बड़ा सभागार बना हुआ है। यदि राजस्थान में विधान परिषद बनती है तो इसका उपयोग किया जा सकता है। देवनानी ने कहा कि कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब का काम अभी अधूरा है, जल्द ही काम को पूरा कराकर क्लब को शुरू किया जाएगा। उन्होंने माना कि इस बार बड़ी संख्या में नए विधायक आए हैं और सरकार में भी पहली बार के मंत्री हैं। मेरा प्रयास है कि सभी के सहयोग से सदन का संचालन किया जाए। नए मंत्रियों को विधानसभा में मेरे चैम्बर में बुलाकर मैं संसदीय कार्यों की जानकारी भी दे रहा हंू। पिछली विधानसभा में अध्यक्ष सीपी जोशी ने पर्ची सिस्टम को बंद कर दिया था, लेकिन मैंने इसे फिर से शुरू कर दिया है। अब विधायक जरूरी सवाल पर्ची पर लिखकर भी दे सकते हैं। मेरा प्रयास होगा कि विधायकों के सभी सवालों के जवाब उपलब्ध करवाए जाए। देवनानी ने कहा कि वे चाहते हैं कि प्रतिवर्ष चालीस दिन तक विधानसभा का संचालन हो। अभी करीब 25 दिन की परंपरा है। सदन बिना बाधा के चले इसके लिए मैंने पहली बार सर्वदलीय बैठक की शुरुआत की है। नए विधायकों को प्रबोधन भी दिया जा रहा है।

 

दिग्गजों को चुनाव लड़ाया:

देवनानी ने बताया कि उनका राजनीतिक जीवन अजमेर से वर्ष 2003 में शुरू हुआ था। इससे पहले वे विद्यार्थी परिषद में सक्रिय रहे। उन्होंने बीस वर्षों तक विद्यार्थी परिषद का काम किया। आठ वर्षों तक वे परिषद के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। देवनानी ने बताया कि विद्यार्थी परिषद का अध्यक्ष रहते हुए ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को अजमेर के गवर्नमेंट कॉलेज के अध्यक्ष, गजेंद्र सिंह शेखावत को जोधपुर यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ के अध्यक्ष, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी को चित्तौड़ कॉलेज, कालीचरण सराफ को जयपुर में राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़वाया। देवनानी ने बताया कि वे तो उदयपुर के कॉलेज में शिक्षक की भूमिका निभा रहे थे, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निर्देश पर उन्हें अजमेर उत्तर से विधानसभा का चुनाव लड़ने का निर्देश दिया। 2003 में पहली बार विधायक बनकर तकनीकी शिक्षा के मंत्री भी बने। हाल ही में वे पांचवीं बार अजमेर से विधानसभा का चुनाव जीते हैं। इस बार का चुनाव उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। कांग्रेस ने एक निर्दलीय को चुनाव लड़वाकर मेरे साथ में बड़ी चुनौती खड़ी की। लेकिन मेरे पिछले बीस वर्षों के कामकाज को ध्यान में रखते हुए मतदाताओं ने मुझे समर्थन दिया। मैं अजमेर उत्तर के मतदाताओं के सुख दुख से जुड़ा रहा हंू। मुझे शादी समारोह के जितने भी निमंत्रण मिलते हैं, उन सभी में भाग लेता हंू। इसी प्रकार क्षेत्र के किसी व्यक्ति के निधन पर उसके उठावने में भी भाग लेता हंू। मैं सहजता के साथ अपने क्षेत्र में उपलब्ध रहता हंू। इस चुनाव में जहां मेरी राजनीतिक सक्रियता से वोट मिले वहीं पीएम मोदी के चेहरे की वजह से ही जीत हुई।  इसे मैं अपना सौभाग्य समझता हूं कि मध्यप्रदेश के बाद देश में दूसरा सिंधी समुदाय के विधानसभा अध्यक्ष  हूं ।

 

अकबर महान नहीं हो सकता:

देवनानी ने बताया कि जब वे 2013 से 2018 के बीच शिक्षा मंत्री थे, तब उन्होंने पाठ्य पुस्तकों से अकबर महान वाला पाठ हटवाया। उन्होंने कहा कि एक आक्रमणकारी हमारे लिए कभी भी महान नहीं हो सकता है। मैंने राजस्थान के दो सौ वीर और वीरांगनाओं के जीवन से जुड़े पाठों को पुस्तकों में शामिल करवाया। उन्होंने कहा कि राजस्थान और देश के लिए महाराणा प्रताप ही महान हो सकते हैं।

 

आनासागर को बचाने की जरूरत:

देवनानी ने कहा कि आज अजमेर के आनासागर के मूल स्वरूप को बचाने की जरूरत है। मैं चाहता हूं कि आनासागर अपने मूल स्वरूप में लौटे। इसके लिए जो कुछ भी किया जाना जरूरी है वह किया जाए। यदि सेवन वंडर की इमारतों को हटाने की जरूरत हो तो उसे भी हटाया जाए। आनासागर के भराव क्षेत्र में हुए अतिक्रमणों को भी हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। अब दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। देवनानी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पिछले शासन में अजमेर शहर की पेयजल वितरण व्यवस्था को खराब किया गया। इसलिए लोगों को तीन-चार दिन में एक बार पेयजल की सप्लाई हुई। लेकिन  विधानसभा का अध्यक्ष बनते ही मैंने अधिकारियों को लीकेज बंद करने और वितरण व्यवस्था सुधारने के सख्त निर्देश दिए। इसलिए अब नागरिकों को 48 घंटे में पेयजल की सप्लाई होने लगी है। उन्होंने कहा कि कोटड़ा में तेलंगाना हाउस का भूमि आवंटन निरस्त करवाकर उन्होंने जनभावनाओं के अनुरूप काम किया है।

 

स्ट्रीट लाइट में पढ़ाई:

देवनानी ने बताया कि उनका बचपन अभावों में बीता। 1947 में विभाजन के समय उनके पिता सिंध में सब कुछ छोड़ कर अजमेर आ गए। बड़ी मुश्किल से परिवार का पालन किया। उनके पिता ने डाकघर में नौकरी कर हम बच्चों को पढ़ाया। दसवीं तक उन्होंने अजमेर के सुभाष बाग की स्ट्रीट लाइट के नीचे बेठ कर पढ़ाई की। चूंकि उन्हें शुरू से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शिक्षा मिली इसलिए उन्होंने कभी भी बेईमानी नहीं की। जोधपुर में इंजीनियर की नौकरी इसलिए  नहीं कर पाए क्योंकि उन्हें बेईमानी मंजूर नहीं थी। उन्होंने बाद में उदयपुर के कॉलेज में शिक्षक की नौकरी की।

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