मुशायरे का आयोजन किया
सोमवार, 12 फ़रवरी 2024
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(रिपोर्टर: अशोक शर्मा)
टोंक। राष्ट्रपति अवार्ड प्राप्त तथा मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी फारसी शोध संस्थान टोंक के संस्थापक निदेशक शौकत अली खां की याद में शनिवार की रात मुराद एकेडमी टोंक एवं नोबल शिक्षा संस्थान टोंक के संयुक्त तत्वावधान में मुशायरे का आयोजन नोबल उच्च माध्यमिक विद्यालय बावडी रोड़ काफला टोंक पर किया गया। मुशायरा कमेटी के संयोजक एवं सरंक्षक मुराद एकेडमी के अब्दुल हफीज खां (शौक अहसनी) ने बताया कि इस मुशायरे की सदारत मौलवी मोहम्मद सईद साहब एवं सैयद मजहर आलम एडवोकेट ने की। मुख्य अतिथि मुजीब अता आजाद पूर्व निदेशक एम.ए.ए.पी.आर.आई. टोंक तथा विशिष्ट अतिथि सलीमुद्दीन खान, अमजद अली खान तथा याकुब अली खान थे। मुशायरे की शुरूआत में शौक अहसनी ने शौकत अली खान को खिराजे अकीदत पेश करते हुए कहा कि ‘‘इल्म का मरकज थे जो रोनक थे कसरे इल्म की, छोडक़र रोनक जहां की आज वो शौकत गये, कह रहे है आज राहत, सरवतों, सौलत अली जो हमारे सर पर थे, अल्लाह की रहमत गये, याद करके शौक जिनको रोएगा सारा जहां, आह वो मरदे कलन्दर वाकिफे हिकमत गये’’। इसके बाद मुशायरे की शुरूआत एजाज फायजी ने सौलत टोंकी की नआते पाक पढक़र की। मुशायरे में शौकत अली खांन की गजल ताहिर खांन ने पेश करते हुए कहा कि ‘‘तस्कीन और दर्द बढ़ाये तो क्या करूं, तेरी जफा भी काम ना आए तो क्या करू, रह रहके तेरी याद रूलाए तो क्या करू, दिल से तेरा ख्याल न जाए तो क्या करू’’। मुशायरे में स्थानीय शायरों के अतिरिक्त देश के विभिन्न शहरों से आए शायरों ने एक से एक कलाम पेश कर श्रोताओं को सुबह 3 बजे तक ठहरने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉं. जिया टोंकी द्वारा किया गया। मुशायरे में शायरों के कलाम को खूब दाद मिली। अफजल इलाहाबादी (प्रयागराज) ने ‘‘ तुझे जुस्तुजु ए सिकन्दरी, मुझे आरजू ए कलन्दरी। तेरा रास्ता कोई और है, मेरा रास्ता कोई और है।। मेरी तामीर मुकम्मल नहीं होने पाती। कोई बुनियाद हिलाता है चला जाता है’’।। वारिस वारसी (मेरठ) ने बेखुदी है न बेकरारी है, आज की रात कितनी भारी है। वो जो मॉं ने कभी दुआ दी थी आज तक उसका फेज जारी है।। अपनी आंखों के समन्दर में उतर जाने दे। आज की रात इसी तरह गुजर जाने दे।। अनवर अमान (आगरा) ने ‘‘रेजा रेजा हर रिश्ता हो जाएगा, घर के आंगन में दीवार उठाना मत। झूंठ भी बोला करते है ये आईने, सामने इनके जाओ तो इतराना मत।। दस्तगीरी हमारी किसी ने न की, खुद ही गिरते रहे और संभलते रहे। सर्फ होता रहा जिनमें खूने जिगर, वो दिये आंधियों में भी जलते रहे’’।। डॉं. जिया टोंकी ने ‘‘किस-किस से वादा कर लिया तूने बहार में। फिर एक जमाना आ गया तेरे हिसार में।। सुहेल पयामी ने जालिम समझ रहा है कि जीता हुआ हूॅ मैं। हार उसकी छुप रही अभी मेरी हार में’’।। पेशे नजर हमादम हरदो की थी हकीकत। वो ख्वाब देखता था अरबी में फारसी में।। अन्दाजे गुफ्तुगु था उसका अबुल कलामी। पोशीदा हिकमते थी उसकी गुफ्तनी में।। शौकत के बाद बस अब हम भी कहां है जिन्दा।हम लोग जी रहे थे एक एहदे शौकती में।। नबील सैफी ने ‘‘नजर मिलाके नजर से ही गुफ्तुगु कर ले। नबील किसको ये इज्जत नसीब होती है’’।। नवाब सैफी ने ‘‘मैं पलके बिछा दूंगा राहों में उनकी। बताये नवाब इतना, कब आ रहे है’’।। अन्जुम सैफी ने ‘‘झूठ बोलूं ये मेरे दिल को गवारा ही नहीं। सच अगर कहता हूॅ तो सर जाता है’’।। सिराज टोंकी ने ‘‘जिनको दस्तार दस्तयाब है वो। सर पे जूतियां रखके चलते है’’।।क ारी इज्जत सैफी ने ‘‘कुछ इस तरह से हुआ तेरे गम से प्यार मुझे। अब एक पल का सुकुं भी है ना ग्वार मुझे’’।। एजाज फाइजी ने ‘‘खूबसूरत हंसी खूबरूं, सिर्फ तू, सिर्फ तू, सिर्फ तू। रात दिन हो जबां पर मेरी, अल्लाहॅंू, अल्लाहॅंू, अल्लाहॅंू’’।। शातिर सैफी ने ‘‘जहां भी देखूं तेरे अब्बा का चेहरा देखूं। अब तो ख्वाबों में भी खुद को लरजता देखूं’’।। मुशायरा में के.आर.खा डॉं. खालिद एहतेशाम, मिर्जा नसीम बेग, डॉं. सैयद माकूल अहमद नदीम, डॉं. सैयद बदर अहमद, शहाब अहमद एडवोकेट, प्रीतम खत्री, मौलाना जमील, केसर मियां, हुसैन खान, हाजी अजमल सैफी, रियाज मोहम्मद, अहमद शहजाद, लियाकत अली, मसूद अली, हाजी मोहम्मद शाकिर खान, आरिफ मेहमूद, सैयद शाहिद शाह, मुजाहिद हुसैन, सैयद जीशान हैदर, मोहम्मद इरशाद, सुहैब अहमद, सैयद अहमद शाह, जावेद खान, असलम अंसारी, अल्ताफ हुसैन, अल्ताफ इरफानी आदि मौजूद थे।
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