टोंक जिले के दवा विक्रेताओं का भुगतान करने की मांग
रविवार, 28 जुलाई 2024
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सुरीला राजस्थान
टोंक। राजस्थान सरकार के सेवारत एवं सेवानिवृत कर्मचारियों के लिए चलाई जा रही योजना आरजीएस के अंतर्गत लाभार्थी के घर पर दवा वितरण (डोर स्टेप डिलेवरी) के प्रति अनुमोदित फार्मा स्टोर उदासीन नजर आ रहे है। अनुमोदित दवा विक्रेता प्रतिकूल शर्तों की वजह से बनाए हुए है दूरियां। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम विभाग की कथनी एवं करनी में असमानता से है अधिकृत दवा विक्रेताओं में रोष व्याप्त है। एमओयू द्वारा 21 दिन में भुगतान करने का आश्वासन दिया गया था। टोंक जिले के अधिकृत दवा विक्रेताओं के लगभग 10 करोड़ से अधिक बकाया है, जल्द से जल्द भुगतान की मांग उठाई। आरजीएच अधिकृत दवा विक्रेताओं का 3 महीने एवं अस्पतालों का भुगतान पिछले 5 महीनों से लंबित है। राज्य सरकार ने राज्य के सेवारत एव सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत डोर स्टेप डिलीवरी (कर्मचारी के घर तक दवा पहुंचाना) की घोषणा की थी। घोषणा की शर्तों में पोर्टल पर बिल रिजेक्शन के डर से अधिकतर अधिकृत दवा विक्रेता योजना को लेकर उदासीन नजर आए। टोंक जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन आहूजा ने डी. एस. डी. यानी डोर स्टेप डिलीवरी योजना में अजीबों गरीब शर्तो पर एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि इस नई योजना से अधिकृत दवा व्यापारियों को सरकार से भुगतान समय पर नहीं होने का डर है। अखिल राजस्थान आर. जी. एच. एस. अधिकृत दवा विक्रेता महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष विवेक विजयवर्गीय ने बताया कि आर. जी. एच. एस. में जुडऩे के लिए 1 लाख रुपए की बैंक गारंटी ली गई थी। विभाग द्वारा अब पुन: होम डिलीवरी की सेवा योजना में अधिकृत दवा विक्रेताओं से 1 लाख रुपए की बैंक गारंटी मांगी जा रही है। राजस्थान में अधिकृत दवा विक्रेताओं का सरकार से 2 अरब से ज्यादा रुपए का भुगतान बकाया है। डोर स्टेप डिलीवरी में पोर्टल पर अगर अधिकृत दवा विक्रेता ने पर्ची स्वीकृत कर ली तो रिजेक्ट नहीं कर सकते, सब्सिट्यूट नही दे सकते, लिखी गयी सभी दवाई उपलब्ध करवाने की बाध्यता पेनेल्टी जैसी शर्ते यहां पर विभाग द्वारा रखी गई है। इस योजना में सेवारत व सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आर. जी. एच. एस. पोर्टल पर अपनी एस. एस. ओ. आईडी के जरिए परामर्श पर्ची अपलोड करनी होती है। पर्ची में जिस ब्रांड की दवा लिखी है तो उसी ब्रांड की दवा देने की बाध्यता होगी। यदि दूसरा नामी ब्रांड दे दिया तो अधिकार दवा विक्रेता का बिल रिजेक्ट कर दिया जायेगा। दुकानदारों ने पर्ची पोर्टल से स्वीकृत कर ली तो वे उसे रिजेक्ट नहीं कर सकते यह बाध्यता स्वीकार नहीं है। योजना के अंतर्गत कैंसर की तीन लाख की दवा जोड़ी हुई है पर इंडियन ब्रांड 14 हजार की नहीं जोड़ी गई। ऐसे अन्य कई कारण है जिससे अधिकृत दवा विक्रेताओं को समस्या है। आर. जी. एच. एस. योजना में कैंसर की कोशिकाओं को बढऩे से रोकने वाली दवा लिनपार्जा 3 लाख रुपए की है। इस दवा को योजना में जोड़ा हुआ है, जबकि दूसरी ओर इंडियन ब्रांड इसी सॉल्ट की दवाईयों को नहीं जोड़ा गया है। इसी तरह कई महँगी दवाईयों को जोड़ा जाना ओर उसी घटक की कम कीमत की दवाईयों को नही जोड़ा जाना राज्य सरकार के लिए शुद्ध नुकसान है। केमिस्टों में आक्रोश है कि सरकार इंडियन ब्रांड को सही नहीं मानती है तो इसे मार्केट में क्यों अप्रूव किया गया। कऱीब ढाई साल से रिजेक्शन और डिडक्शन के बिलों का जानबुझ कर निस्तारण नहीं किया जा रहा है उसमे भी राजस्थान के केमिस्टों का करोड़ों रुपए अटके हुए है, इस वजह से भी केमिस्टों में भयंकर आक्रोश है! इसी कारण आर. जी. एच. एस. के लाभार्थी को समय पर दवाईयो की आपूर्ति नहीं होती है और पर्ची में कोई छोटी मोटी कमी रह जाय तो दुकानदार लाभार्थी को दवाई का मना कर देता है और मरीज़ डॉक्टर और दवा विक्रेता के बीच चक्कर काट काट कर परेशान होता रहता है। सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलने वाला और आगामी दिवसों में समस्याओं का त्वरित निस्तारण नहीं किया गया तो लाभार्थियों को दवा मिलने में होने वाली असुविधा के लिए राज्य सरकार स्वयं जिम्मेदार होगी। जिले के केमिस्ट साथियों ने राज्य सरकार की योजना को सफल बनाने में भरपूर योगदान दिया है। टोंक जिले के दवा विक्रेताओं का भुगतान तुरंत किया जाना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा सुविधा बाधित हो सकती है।

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