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भक्ति से मानव परहित व परोपकार भी कर सकते है- विज्ञाश्री

भक्ति से मानव परहित व परोपकार भी कर सकते है- विज्ञाश्री

 


विज्ञातीर्थ गुंसी में चातुर्मास के लिए स्थापित हुए 117 मंगल कलश

सुरीला राजस्थान 

निवाई/गुन्सी। गांव गुन्सी में स्थित सहस्त्रकूट जिनालय विज्ञातीर्थ में धूमधाम से चातुर्मास मंगल कलश स्थापना समारोह का आयोजन हुआ। समारोह में श्रद्धालुओं ने आर्यिका की मौजूदगी में वर्षायोग का ध्वज और पताकाएं स्थापित की। जैन समाज के प्रवक्ता योगेंद्र सिंहल व निवाई चातुर्मास कमठी अध्यक्ष सुनील भाणजा ने बताया कि विज्ञातीर्थ में चातुर्मास का मुख्य मंगल कलश स्थापना निर्मल जैन, सुधा जैन मध्यप्रदेश ने पं. विमल शास्त्री बनेठा के सानिध्य में विधि विधान और मंत्रोच्चार एवं भजनों के साथ स्थापित किए। द्वितीय कलश कंवरपाल जैन, मनोरमा जैन व हितार्थ जैन बाइस गोदाम नंदपुरी जयपुर ने किया। तृतीय कलश स्थापना सुनील जैन सांगानेर ने किया। उन्होंने बताया कि वर्षायोग के लिए 9 बडे और108 छोटे मंगल कलशों की स्थापना श्रद्धालुओं द्वारा आर्यिका विज्ञाश्री माताजी के सान्निध्य में की गई। इस अवसर पर विज्ञाश्री महिला मंडल द्वारा मंगलाचरण किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पादप्रक्षालन, शास्त्र भेंट, जिनवाणी भेंट तथा वस्त्र भेंट किए। विज्ञाश्री माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि ईश्वर की भक्ति और ध्यान से मानव का कल्याण होता है। मानव को सदैव सदाचारी रहते हुए भगवान महावीर के मुख्य तीन संदेश अहिंसा, अपरिग्रह और सत्य को जीवन में अपनाना चाहिए। भक्ति से मानव परहित व परोपकार भी कर सकता है। सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा विज्ञातीर्थ में कलश स्थापना करने वाले परिवारों का स्वागत सत्कार किया गया। समारोह में मध्यप्रदेश, जयपुर, सांगानेर, टोंक, निवाई, चाकूस, मालपुरा व झिलाय सहित कई स्थानों से श्रद्धालु विज्ञातीर्थ पहुंचकर आर्यिका विज्ञाश्री माताजी को श्रीफल चढाकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान उद्योगपति सुशील जैन, महावीरप्रसाद पराणा, राजेंद्र बगडी, नरेश बनेठा, अशोक जैन, अरविंद जैन व जितेन्द्र जैन सहित जैन समाज के विभिन्न महिला मंडल तथा सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे।

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