पायलट का सीधे अनशन करना गलत’
प्रदेश प्रभारी बोले- सीएम तो मैं भी नहीं बन पाया था; सचिन को तो बहुत कुछ मिला है
जयपुर | सचिन पायलट ने मंगलवार को जयपुर में शहीद स्मारक पर अनशन करने की घोषणा कर कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को फिर सतह पर ला दिया है। सचिन पायलट की घोषणा के बाद राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा डैमेज कंट्रोल में लगे हैं, लेकिन पायलट अनशन पर अड़े हैं। सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भास्कर को दिए इंटरव्यू में कहा- मुख्यमंत्री तो मैं भी नहीं बन पाया, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि पार्टी छोड़कर चले जाएं।
रंधावा ने कहा- सचिन पायलट सवा साल डिप्टी सीएम रहे, तब करप्शन का मुद्दा क्यों नहीं उठाया? मेरे से मुलाकात में कभी उन्होंने करप्शन पर बात नहीं की। पार्टी प्लेटफार्म पर बात करने की जगह सीधे अनशन पर बैठना गलत है।
पढ़िए सचिन पायलट के मुद्दे पर कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा का पूरा इंटरव्यू...
सवाल- सचिन पायलट ने बीजेपी राज में हुए करप्शन पर एक्शन नहीं होने का मुद्दा उठाकर अनशन करने की घोषणा की है। डैमेज कंट्रोल करेंगे या एक्शन लेंगे?
रंधावा- सचिन पायलट ने मुझसे कभी इस मामले में कभी बात ही नहीं की। मैं जब भी आता हूं, उनसे बात होती है। मिलते हैं, लेकिन कभी जिक्र तक नहीं किया। पायलट खुद डिप्टी सीएम रहे। उस वक्त उन्होंने यह बात क्यों नहीं उठाई? अनशन करने से पहले उन्हें मेरे सामने तो यह मुद्दा रखना चाहिए था।
मैं सीएम से बात करता, फिर भी समाधान नहीं होता तो वे अनशन करते। तब बात समझ आती। पार्टी प्लेटफाॅर्म पर बात रखने की जगह सीधे अनशन पर बैठना गलत है।
पायलट को जब करप्शन पर बोलना ही था तो असेंबली में बोल सकते थे। वहां बात रिकॉर्ड पर भी आ जाती। सीएम को असेंबली में जवाब भी देना पड़ता। अनशन पर बैठने के फैसले से पहले पार्टी प्लेटफाॅर्म पर बात रखनी चाहिए थी।
सवाल- प्रदेश प्रभारी के नाते आप क्या कर रहे हैं? क्या पायलट को मनाने की कोशिश की?
रंधावा: मैं कल जयपुर आ रहा हूं। मैं पहले पायलट के सीएम को लिखे लेटर्स को भी देखूंगा। उनका सीएम ने जवाब क्यों नहीं दिया, इसे भी देखूंगा। पूरे मामले में बात भी की जाएगी। मैं जैसा कि पहले कह चुका हूं, सड़क पर किसी मुद्दे का समाधान नहीं होता है। बातचीत से ही समाधान होता है।
लेटर वाले इश्यू को देखा जाएगा। फिलहाल मेरी पायलट से बात नहीं हुई है। जयपुर आने के बाद पूरे मामले को देखेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सीधे अनशन की घोषणा ही कर दी तो क्या बात करते।
सवाल- पायलट ने सीएम को घेरा है, इस नए क्राइसिस पर पार्टी क्या करेगी?
रंधावा- करप्शन के खिलाफ सरकार काम कर रही है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह के खिलाफ संजीवनी मामले में केस दर्ज कर जांच की है। कौन कहता है कि करप्शन के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते। अब संजीवनी का मामला सीबीआई को देने की मांग गजेंद्र सिंह ओर बीजेपी वाले कर रहे हैं। क्यों दे दें सीबीआई को जब राजस्थान की एजेंसियां प्रभावी तरीके से जांच कर रही हैं।
सवाल- क्या हाईकमान ने पूरे मामले में आपसे कोई रिपोर्ट मांगी है, डैमेज कंट्रोल के लिए कहा या नहीं?
रंधावा- हाईकमान मैं ही हूं, मैं जयपुर आकर पूरी डिटेल लूंगा। पायलट के लेटर्स को भी देखूंगा। जवाब नहीं देने के कारणों को भी देखूंगा। पार्टी फोरम पर बैठकर हम बात करेंगे।
भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी कांग्रेस लड़ाई लड़ रही है। हमारे नेता राहुल गांधी को भी भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने पर ही सजा मिल रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ बात करना तो पायलट का अधिकार है। मैं उसके खिलाफ नहीं हूं, लेकिन पहले मुझसे बात करते। सीधे अनशन पर बैठना गलत है।
सवाल- क्या पायलट के मुद्दे को ढंग से हैंडल नहीं करने की वजह से फिर क्राइसिस पैदा हुआ?
रंधावा: मैं जब भी जयपुर आता हूं, हर बार सचिन पायलट को फोन करता हूं। उनके घर जाकर मिलता हूं, बात करता हूं। कम से कम मुझसे तो इसका जिक्र करना चाहिए था। मेरे से पायलट इस मुद्दे पर बात करते और मैं कनिं्वस हो जाता तो हो सकता है मैं भी उनका साथ देता।
इस वक्त पर जब कांग्रेस में क्राइसिस चल रहा है, राहुल गांधी केंद्र के करप्शन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने अभियान छेड़ रखा है। ऐसे वक्त में पायलट को विवाद नहीं करना चाहिए। इससे राहुल गांधी ने जो मुद्दा उठा रखा है, उससे ध्यान हटेगा।
सवाल- कांग्रेस में हर राज्य में अच्छे नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, पायलट भी नाराज हैं। क्राइसिस में भी आप नेताओं को रोक क्यों नहीं रहे, क्या पायलट भी अब उसी राह पर हैं?
रंधावा: मैं ऐसा नहीं मानता। सचिन पायलट फ्यूचर लीडर हैं, उनमें संभावनाएं हैं। इतनी सी छोटी उम्र में सचिन पायलट को पार्टी ने क्या-क्या नहीं दिया? केंद्रीय मंत्री, पीसीसी चीफ और डिप्टी सीएम जैसे पद दिए हैं। पायलट के पास उम्र है।
हमारे जैसे लोगों को तो इनकी तुलना में बहुत कम मिला है। पंजाब में जब अमरिंदर सिंह को हटाया, तब मेरा नाम सीएम के तौर पर तय हो गया था, लेकिन नहीं बन पाया। इसका मतलब यह थोड़ी न है कि मैं कांग्रेस छोड़ दूं। पायलट को इतनी कम उम्र में बहुत कुछ मिला है।
इनकी उम्र में तो हम जैसे लोगों को कुछ नहीं मिला था। आज भी बहुत से नेता हैं, जिन्हें नहीं मिला। पंजाब में जब हमने अमरिंदर सिंह को सीएम पद से हटाया तो हमारे पास नंबर थे। हमने अपने नंबर पूरे करके बात की थी।
सवाल- बजट की लोकलुभावन घोषणाओं की खूब ब्रांडिंग हो रही है, इन योजनाओं को चुनावी मुद्दा बनाने जा रहे थे, लेकिन अब पायलट का मुद्दा इन पर भारी नहीं हो गया?
रंधावा- सरकार की योजनाओं का बहुत जोरदार असर है। हम योजनाओं को चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। राजस्थान सरकार की योजनाओं का संगठन भी प्रचार-प्रसार करेगा। राजनीतिक मुद्दों का हल राजनीतिक तरीके से होता है। हम जिला लेवल तक जाकर सरकार के कामों का प्रचार करेंगे, संगठन इस काम में लगेगा। हम डैमेज कंट्रोल भी करेंगे।
सवाल- क्या दोनों के बीच अब सुलह की कोई गुंजाइश नहीं है?
जवाब- राजनीति में गुंजाइश तो हमेशा बनी ही रहती है। यहां कोई परमानेंट दोस्त या दुश्मन नहीं होता। मुद्दों की लड़ाई होती है।
इधर, सचिन पायलट ने सोमवार को एक ट्वीट में राजस्थान के स्वाभिमान की बात कर सियासी चर्चा छेड़ दी है.
कांग्रेस ने गहलोत की तारीफ कर संकेत दिए
पायलट की अनशन की घोषणा के बाद कांग्रेस के अधिकारिक बयान में गहलोत की तारीफ ने भी कई तरह के संकेत दिए हैं। रविवार शाम को पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ी संख्या में योजनाओं को लागू किया है और कई ऐसी पहल की हैं, जिन्होंने लोगों को गहराई से प्रभावित किया है। इस वजह से राज्य को हमारे देश में शासन में नेतृत्व की स्थिति प्रदान की है।
रमेश ने साफ कहा कि राजस्थान में पार्टी संगठन के समर्पण और दृढ़ संकल्प से ही राज्य में भारत जोड़ो यात्रा जबरदस्त रूप से सफल हुई थी। इस वर्ष के अंत में कांग्रेस इन ऐतिहासिक उपलब्धियों और हमारे संगठन के सामूहिक प्रयासों के दम पर लोगों के बीच जाकर फिर से सेवा करने के लिए जनादेश मांगेगी।
पायलट ने गहलोत-वसुंधरा के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया था
सचिन पायलट ने रविवार को आरोप लगाया था कि विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने वादा किया था कि वसुंधरा सरकार के भ्रष्टाचार की जांच कर कार्रवाई करेंगे। इस पर लोगों ने भरोसा किया और सरकार बनी। अब सवा चार साल में एक भी कार्रवाई नहीं हुई तो विरोधी कहेंगे कि इनकी मिलीभगत है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि चुनाव में जाने से पहले उन मामलों पर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि लोगों को लगे कि हमने सिर्फ राजनीतिक रोटी सेकने के लिए आरोप नहीं लगाए।

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