ताइवान पर हमले के लिए चीन ने किया युद्धाभ्यास
71 फाइटर जेट और 45 वॉर प्लेन ने पोजिशन ली, ऑपरेशन को जॉइंट स्वॉर्ड नाम दिया
विदेश | ताइवान की राष्ट्रपति की अमेरिका विजिट से नाराज चीन ने युद्ध अभ्यास शुरू कर दिया है। चीन ने दूसरे दिन की मिलिट्री ड्रिल के दौरान ताइवान को 71 फाइटर जेट्स और 45 वॉर प्लेन से घेर लिया। इस पूरे ऑपरेशन को जॉइंट स्वॉर्ड नाम दिया गया है। ये सोमवार तक जारी रहेगा।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि चीनी एयरफोर्स के कई विमानों ने सुबह से उनके देश के आस-पास से कई उड़ाने भरी हैं। वो बीजिंग की मिसाइल फोर्सेस पर भी नजर बनाए हुए है। वहीं, अमेरिका ने चीन के युद्ध अभ्यास के बीच उसे शांत रहने की सलाह दी है।
चीन ने पहली बार ताइवान पर हमले की जगहों को सार्वजनिक किया
चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक युद्धाभ्यास के पहले दिन चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने समुद्र, हवा और सूचना को कंट्रोल में रखने की प्रैक्टिस की थी। वहीं दूसरे दिन जमीनी हमलों का अभ्यास किया गया। ये पहली बार था जब चीन ने आधिकारिक तौर पर ताइवान पर हमले की जगहों को सार्वजनिक किया।
चीन अकेडमी ऑफ मिलिट्री साइंस के रिसर्च फेलो ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि जंग के दौरान इन टारगेट्स पर अटैक करना काफी अहम होगा। इनमें ताइवान के अहम एयरफील्ड, मिलिट्री सिस्टम्स की जगह शामिल हैं।
चीन ये हथियार भी तैनात किए
-191 - ये आर्मी का लंबी दूरी का मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम है।
052ब् डिस्ट्रोयर- ये चीन की नेवी का मिसाइल तबाह करने वाली सिस्टम है। इसकी रेंड 8300 किलोमीटर की है।
054। फ्रिगेट- ये चीन की नेवी का मिसाइल वॉर शिप है।
टाइप 22 मिसाइल बोट- ये मिसाइल बोट चीन ने 2004 में तैयार की थी। इसे चीन के तटीय इलाकों के निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
भ्-6ज्ञ बॉम्बर- ये चीन का दो इंजन वाला जेट है। इसे चीन की न्यूक्लियर ब्रिगेड भी इस्तेमाल करती हैं।
अमेरिका बोला चीन की हरकतों पर हमारी नजर
चीन के इस तरह से ताइवान के पास युद्धाभ्यास करने पर अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता ने कहा कि वो चीन की हरकतों पर नजर बनाए हुए हैं। अमेरिका के पास इलाके में शांति बनाए रखने के लिए उचित संसाधन हैं। हम अपने नेशनल सिक्योरिटी के वादों को पूरा करने में सक्षम हैं।
5 अप्रैल को अमेरिका पहुंची थीं ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन
तस्वीर ताइवान की राष्ट्रपति साइ इंग वेन (बाएं) और अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्ज के स्पीकर केविन मैकार्थी (दाएं) की है।
दरअसल, ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन ने 5 अप्रैल को कैलिफोर्निया में स्पीकर मैकार्थी से मुलाकात की थी। जिसे चीन ने भड़काऊ हरकत बताया था। युद्धपोत और लड़ाकू विमानों से ताइवान की रेकी करने के अलावा चीन ने अमेरिका में ताइवान के प्रतिनिधि पर पाबंदियां लगा दी। प्रतिनिधि हसिआओ बी किम और उनका परिवार पाबंदियों के चलते अब कभी चीन, हांगकांग और मैकाउ नहीं जा पाएगा। इसके अलावा राजदूत की कंपनियां भी चीन के साथ कोई व्यापार नहीं कर पाएंगी।
वहीं, चीन ने दो अमेरिकी संस्थाओं पर भी बैन लगाने की घोषणा की। रिपोट्र्स के मुताबिक इन्हीं दो संस्थाओं ने राष्ट्रपति साई इंग वेन की अमेरिकी यात्रा की प्लानिंग की थी। इन संस्थाओं में कैलिफोर्निया की रोनाल्ड रीगन लाइब्रेरी भी शामिल है।
अमेरिका-चीन के रिश्तों में ताइवान सबसे बड़ा फ्लैश पॉइंट
अमेरिका ने 1979 में चीन के साथ रिश्ते बहाल किए और ताइवान के साथ अपने डिप्लोमैटिक रिश्ते तोड़ लिए। हालांकि चीन के ऐतराज के बावजूद अमेरिका ताइवान को हथियारों की सप्लाई करता रहा। अमेरिका भी दशकों से वन चाइना पॉलिसी का समर्थन करता है, लेकिन ताइवान के मुद्दे पर अस्पष्ट नीति अपनाता है।
राष्ट्रपति जो बाइडेन फिलहाल इस पॉलिसी से बाहर जाते दिख रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि अगर ताइवान पर चीन हमला करता है तो अमेरिका उसके बचाव में उतरेगा। बाइडेन ने हथियारों की बिक्री जारी रखते हुए अमेरिकी अधिकारियों का ताइवान से मेल-जोल बढ़ा दिया।
इसका असर ये हुआ कि चीन ने ताइवान के हवाई और जलीय क्षेत्र में अपनी घुसपैठ आक्रामक कर दी है। छल्ज् में अमेरिकी विश्लेषकों के आधार पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक चीन की सैन्य क्षमता इस हद तक बढ़ गई है कि ताइवान की रक्षा में अमेरिकी जीत की अब कोई गारंटी नहीं है। चीन के पास अब दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है और अमेरिका वहां सीमित जहाज ही भेज सकता है।
अगर चीन ने ताइवान पर कब्जा कर लिया तो पश्चिमी प्रशांत महासागर में अपना दबदबा दिखाने लगेगा। इससे गुआम और हवाई द्वीपों पर मौजूद अमेरिका के मिलिट्री बेस को भी खतरा हो सकता है।

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