टोंक में मोतीसागर बांध की चली चादर
लगातार हो रही बारिश से हुई पानी की अच्छी आवक, 17 फीट है भराव क्षमता
टोंक | जिले के सबसे पुराने बांधों में शुमार मोतीसागर बांध की सोमवार को चादर चल गई। बांध की चादर चलने के बाद स्थानीय लोगों में खुशी देखी जा रही है। गांव समेत आसपास के लोग बांध को देखने पहुंच रहे हैं। इस बांध की चादर चलने पर भीलवाड़ा, जयपुर से बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाने आते हैं। खासकर संडे के दिन तो बांध पर इतनी भीड़ उमड़ती है कि यहां ओवरफ्लो पानी में नहाने के लिए पैर रखने की जगह नहीं मिलती है।
बांध की ऊंचाई 17 फीट, 1955 में हुआ था निर्माण
बीसलपुर बांध परियोजना के अधीन आने वाले इस बांध की ऊंचाई 17 फीट है। परियोजना के एक्सईएन मनीष बंसल ने बताया कि यह बांध काफी पुराना है। इसका निर्माण करीब 1955 में कराया गया था। इसकी बनावट काफी हटकर है। इसके चलते यहां चादर चलने के बाद लोग बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाने आते है। इससे 7 गांवों की करीब 10 हजार बीघा जमीन सिंचित होती है।
धन्ना भगत की जन्मस्थली आने वाले श्रद्धालु घूमने आते हैं
मोतीसागर बांध के पास पास धुंआ कला में बड़ा धार्मिक स्थल है। विश्व प्रसिद्ध धन्ना भगत गुरुद्वारा है। इसके अलावा प्राचीन गंगेश्वर महादेव मंदिर है। बांध ओर पिकनिक मानने आने वाले लोग इन धार्मिक मंदिरों में जाते है। धुंआ कला के पास धन्ना भगत की जन्मस्थली काफी प्रसिद्द है।

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