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दूसरों की सेवा ही मानव धर्म है- राष्ट्रीय संत भगतप्रकाश महाराज

दूसरों की सेवा ही मानव धर्म है- राष्ट्रीय संत भगतप्रकाश महाराज

 

निवाई। राष्ट्रीय संत भगतप्रकाश महाराज के निवाई आगमन पर जोरदार स्वागत किया गया। हेमनदास फूलवानी ने बताया कि झिलाय रोड से राष्ट्रीय संत भगतप्रकाश महाराज को भांगडा ढोल के साथ नाचते गाते श्रद्धालु जुलूस के रुप झूलेलाल मंदिर लेकर आए। महाराज ने भगवान दरबार में मात्था टेका तथा सिंधी धर्मशाला में विशाल धर्मसभा आयोजित की गई। इस दौरान राष्ट्रीय संत भगत प्रकाश महाराज ने कहा कि मानव को सौ जन्मों तक कर्माे का फल भोगना पडता है। मानव को मस्तिष्क से भौतिकता निकालकर सत्संग करना चाहिए। सत्संग का फल अमिट और शाश्वत होता है। जो सत्संगी व्यक्ति की सात पीढी को मिलता है। उन्होंने कहा कि परोपकार ही मानव मुक्ति का मार्ग है। दीन हीन, गरीब, असहाय सहित दूसरों की सेवा ही मानव धर्म है। इस दौरान राष्ट्रीय संत भगतप्रकाश महाराज के सानिध्य में  कोटा, भीलवाडा, जयपुर, जोधपुर, सवाईमाधोपुर, टोंक, मालपुरा सहित विभिन्न स्थानों से सैंकडों श्रद्धालुओं ने सत्संग का लाभ लिया। इसके बाद नरेंद्र कुमार डासवाणी व दिलीप डासवाणी ने राष्ट्रीय संत भगतप्रकाश महाराज और सभी संतों का स्वागत किया। इस दौरान नानकी, बेला, हेमा, शांता, रेशु, पूजा, राहुल, प्रतीक, रजत, अजय भव्य यश, झामनदास, महेंद्र, त्रिलोक लाभ सहित सैंकडों श्रद्धालु मौजूद थे।

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