ऐसे हैं हमारे जिले के कार सेवक:: 5 दिन तक दिन-रात पैदल चलकर पहुंचे थे कार सेवक अयोध्या
निवाई। श्री अयोध्या धाम में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा सोमवार को हो रही है। इस कार्य हेतु हुए आंदोलनों में कार सेवक अपनी जान की बाजी लगाकर अयोध्या पहुंचे, गुंबद को तोड़ा, ढांचे का मलबा हटाया और राम चबूतरा पर भगवान को विराजमान करवाया। उनमें से कई कार सेवक अब इस दुनिया में नहीं हैं। कार सेवा हेतु निवाई उपखंड मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्र से भी कई कार सेवक 1990 व 1992 की कार सेवा में अयोध्या पहुंचे और राम काज में अपना योगदान दिया। ऐसे ही कुछ कार सेवकों ने उनके अनुभव जाने। कई अलग-अलग टोलियों में कार सेवक रवाना हुए थे। तत्कालीन कार सेवा समिति के जिला प्रचार प्रमुख नरेश डासवाणी ने बताया कि 24 अक्टूबर 1990 को शाम 3 बजे 122 सदस्य दल अयोध्या के लिए रवाना हुआ। कार सेवा दल में संघ के जिला प्रचारक शिव लहरी, समिति के जिला प्रमुख दिनेश गौतम देवली, राजेंद्र साहू, गुलाबचंद गुरुजी, पूर्व मुख्य सचेतक महावीरप्रसाद जैन, भंवरलाल सीदडा, कजोड़मल पणिहारा, शंभू चंवरिया, वैद्य प्रहलाद गौतम, कैलाशचंद घाटी, राकेश चंवरिया, शैतानसिंह, धर्मेन्द्र, पारसमल झिराना, महेश पारीक झिलाय, ओमप्रकाश शर्मा रजवास, निर्मल जैन, हेमराज शर्मा खंडवा, प्रहलाद रैगर, सुरेश साहू सहित अनेक कार सेवक जयपुर से ट्रेन से रवाना होकर दिल्ली पहुंचे। इसके बाद दिल्ली से लखनऊ एक्सप्रेस ट्रेन में सवार होकर रवाना हुए। उन्होंने बताया कि उन्हें सवाई माधोपुर जंक्शन से सीधी अयोध्या जाने वाली ट्रेन से जाना था लेकिन सरकार द्वारा सभी ट्रेनें बंद कर दी गई थी। इसलिए जयपुर जंक्शन होते हुए रवाना होना पड़ा। इनमें से अधिकतर कार सेवक लखनऊ में पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए।
कार सेवक राकेश चंवरिया ने बताया कि- लखनऊ से मुख्तार अब्बास नकवी के नेतृत्व में कुछ कार सेवक 5 दिन तक लगातार छिपते-छिपाते हुए अयोध्या पहुंच गए और कार सेवा में भाग लिया।
कार सेवक नरेश डासवाणी ने बताया कि- 1990 की कार सेवा में मुलायम सरकार ने कार सेवकों पर फायरिंग करवा दी जिसमें कार सेवक मारे गए। उन्होंने बताया कि अयोध्या के एक व्यक्ति ने हम सभी कार सेवकों को एक कमरे में छिपा लिया। सरकार का दावा था कि जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता वहां हजारों कार सेवक रामजन्म भूमि स्थल पर पहुंच गए और ढांचे को नुकसान पहुंचाया और झण्डा फहराया। उन्होंने बताया कि हमें संगठन से आदेश मिला था कि सरकार धरपकड कर रहीं है। इसलिए चलती ट्रेन से कहीं भी उतर जाना है। इस पर गौंडा में चलती ट्रेन से हम लोग उतर गए और रात के अंधेरे में चलते रहे।
कई कार सेवक नहीं देख पा रहे है प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव-कार सेवा के आन्दोलन में भागेदारी निभाने वाले कई कार सेवक अब इस दुनिया में नहीं हैं। इनमें राजेन्द्र साहू, सूरेश साहू, गुलाबचंद गुरूजी, शंभू चंवरिया शामिल हैं।

0 Response to "ऐसे हैं हमारे जिले के कार सेवक:: 5 दिन तक दिन-रात पैदल चलकर पहुंचे थे कार सेवक अयोध्या"
एक टिप्पणी भेजें