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एडीए के उन अफसरों पर कार्यवाही होनी चाहिए जिन्होंने आवासीय कॉलोनी के भूखंडों को कमर्शियल कर दिया।

एडीए के उन अफसरों पर कार्यवाही होनी चाहिए जिन्होंने आवासीय कॉलोनी के भूखंडों को कमर्शियल कर दिया।

  • अजमेर के पुष्कर रोड को फॉयसागर रोड से मिलाने के लिए लिंक रोड की छह लेन बनाने का मामला

(एसपी मित्तल)

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अजमेर। अजमेर उत्तर क्षेत्र के भाजपा विधायक और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अजमेर विकास प्राधिकरण (एडीए) के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पुष्कर रोड को फॉयसागर रोड से मिलाने के लिए मौजूदा लिंक रोड को छह लेन किया जाए। ताकि आने वाले ट्रैफिक जाम की चुनौतियों से निपटा जाए। इसके लिए एडीए ने 7 करोड़ 50 लाख रुपए की राशि स्वीकृत भी कर दी है। अब मित्तल अस्पताल से लेकर फायसागर रोड के टेलीफोन एक्सचेंज तक के मार्ग को चौड़ा कर 6 लेन का स्वरूप दिया जाएगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि क्षेत्रीय विधायक देवनानी की यह पहल विकास की दृष्टि से अच्छी है, लेकिन लिंक रोड को 6 लेन बनाने से पहले एडीए के उन अधिकारियों पर कार्यवाही की जानी चाहिए जिन्होंने इस लिंक रोड पर बसी हरिभाऊ उपाध्याय नगर, बीके कौल नगर आदि आवासीय कॉलोनी के भूखंडों को कमर्शियल कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश है कि स्थानीय निकायों ने जो आवासीय कॉलोनियां बनाई है, उनके किसी भी भूखंड को कमर्शियल न किया जाए, लेकिन एडीए के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवलेह ना कर स्वयं की आवासीय कॉलोनी के आवासीय भूखंडों को कमर्शियल कर दिया है। कमर्शियल भूखंड होने के बाद सरकारी नाले और सड़क पर दुकानों, शोरूम, कॉम्प्लेक्स के कब्जे हो गए है। कमर्शियल गतिविधियां होने से एडीए की आवासीय कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है। एडीए के अधिकारियों की मिलीभगत से सड़क किनारे दो भूखंडों पर भी एक साथ दुकानें बन गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लिंक रोड को 6 लेने कैसे किया जाएगा? अच्छा हो कि पहले कमर्शियल भूखंडों वापस आवासीय बनाया जाए और फिर सरकारी सड़क पर जो अतिक्रमण हुआ है उसे हटाया जाए। जब तक कॉमर्शियल अवैध निर्माण नहीं तोड़े जाएंगे तब तक इस लिंक रोड को 6 लेने नहीं किया जा सकता। एडीए ने सबसे ज्यादा बुरा हाल हरिभाऊ उपाध्याय नगर के ए और बी ब्लॉक का किया है। जिस तरह आवासीय भूखंडों पर कमर्शियल गतिविधियां हुई है, उससे कॉलोनी की गलियों में जाम के हालात होने लगे हैं। ए ब्लॉक में जिस तरह प्राइवेट अस्पताल खुले हैं उस से अस्पताल के वाहन आवासीय कॉलोनी की गलियों में खड़े होते हैं। भ्रष्टाचार का इतना बोलबाला है कि नगर निगम और एडीए के अधिकारी इन कमर्शियल संस्थानों पर कोई कार्यवाही नहीं करते। 



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