विधानसभा में विधायक अशोक कोठारी ने भीलवाड़ा के समग्र विकास के लिए रखी विभिन्न मांगें
रविवार, 28 जुलाई 2024
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सुरीला राजस्थान
भीलवाड़ा | विधानसभा में बजट के अनुदान की मांग संख्या 39, 40 के तहत नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन पर बोलते हुए विधायक कोठारी ने नगर परिषद को नगर निगम में क्रमोन्नत करने के लिए मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री तथा गांधीसागर तालाब का सौंदर्यीकरण करने के लिए नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री का आभार, धन्यवाद व्यक्त किया। विधायक कोठारी ने विधानसभा में अपनी मांग पर बोलते हुए कहा कि भीलवाड़ा एशिया का माना हुआ टेक्स्टाइल हब है। औद्योगिक नगरी भीलवाड़ा में देश व विदेश के व्यापारियों व कामगारों का आवागमन लगा रहता है। मेरा आपसे आग्रह है कि को कोटा व उदयपुर की तर्ज पर विकसित करने हेतु बजट दिया जाए।
भीलवाड़ा की मुख्य समस्या ट्रैफिक के समाधान के लिए पूर्व में जो प्रस्ताव दिये हैं, जिसमें एक एलिवेटिड रोड व एक आरओबी की मांग थी, पुनः इसकी बजट स्वीकृति हेतु मांग रखी। शहर के बीचोंबीच नेहरू तलाई नाम से जलाशय है। जिसका सौंदर्य रखरखाव के अभाव में खोता जा रहा है। इसके लिए विशेष परियोजना स्वीकृत कर इसका सौंदर्यीकरण कराने का आग्रह करता हूँ। शहर में मुख्यतः 280 पार्क हैं। इनमें से अधिकांश पार्कों की हालत बहुत खराब हैं। मैं चाहता हूँ कि इन पार्कों का रखरखाव स्थानीय विकास समितियों के मार्फत किया जाये।
भीलवाड़ा एक प्राचीन सभ्यता व संस्कृति का केन्द्र है। जहाँ चारभुजानाथ का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है जिसको पुराना भीलवाड़ा के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यह वर्षों पुरानी बसावट है उसके अंतर्गत रास्ते व गलियाँ बहुत संकरी हैं। विद्युत के तारों का खतरा आये दिन बना रहता है। जानमाल की हानि की सम्भावना बहुत ज्यादा है। यहाँ से विद्युत के तारों की लाइनों को अण्डरग्राउण्ड करने का प्रारम्भ करते हुए शहर के सभी क्षेत्रों की विद्युत लाइनों को अण्डरग्राउण्ड करवायें।
आये दिन नगर निकायों में भ्रष्टाचार की बड़ी शिकायतें सामने आ रही हैं। पूर्व की सरकारों ने जनता के साथ अन्याय करते हुए बहुत बड़े बड़े घोटाले किये हैं। इसकी जाँच व रोकथाम के लिए प्रत्येक 6 माह में नगरीय निकायों की ऑडिट की स्वीकृति करावें, जो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, उनको सजा दिलाई जाए, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगे।
योजनान्तर्गत व गैर योजनान्तर्गत कॉलोनियों के पट्टे नहीं मिलना जनता की बहुत बड़ी समस्या है, विशेष रूप से कच्ची बस्ती के पट्टे नहीं मिलना वहाँ के निवासियों के लिए मानसिक परेशानी का सबब बनता जा रहा है। मेरा अनुरोध है कि पट्टे बनाने की प्रक्रिया को सरल करते हुए सतत् जारी रखना चाहिये, जिससे आमवर्ग को राहत मिलेगी।
शहर में कचरा प्रबंधन अव्यवस्थित है। कचरा कीर खेड़ा ट्रेचिंग ग्राउण्ड में डाला जाता है जहाँ इसको डिकम्पोज करने का एक ही संयंत्र है, जिसकी क्षमता मात्र 140 मैट्रिक टन प्रतिदिन है और इसके अनुपात में प्रतिदिन 180 से 200 मैट्रिक टन कचरा शहर से उठता है। जिसके कारण कचरे का ढेर बढ़ता जा रहा है। आये दिन कचरा जलने के कारण वायु प्रदूषण होने से आसपास के क्षेत्र के निवासी व पास ही स्थित मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी व स्टाफ को सांस लेने में भी परेशानियाँ झेलनी पड़ रही हैं।
इसी के साथ में यह भी निवेदन करना चाहूँगा कि भीलवाड़ा में कचरे को एकीकृत करने के लिए अन्य शहरों जैसे कॉम्प्रेस यूनिट नहीं है भीलवाडा 2 भागों में बँटा हुआ है अगर भीलवाडा शहर हेतु दो कॉम्प्रेस यूनिट स्थापित की जाती है तो मेरा यह मानना है कि कचरे की समस्या का 80 परसेंट हल हो जाएगा यह न केवल भीलवाड़ा की सुंदरता को बढ़ाएगा अपितु यह भीलवाडा शहरवासियों को भी कचरे की समस्या से आज़ादी देगा। जल मानव जीवन और उद्योगों हेतु वरदान है, अगर आपके पास पर्याप्त जल है तो आपके शहर में उद्योग धंधों के साथ-साथ शहर का भी विकास होगा। भीलवाड़ा नगर परिषद द्वारा अभी तक कोई भी अनुबंध नहीं किया जाने से ैज्च् प्लांट से 30 डस्ज् जल शुद्ध कर व्यर्थ ही नदियों में बहाया जा रहा है। अगर परिषद् कम रेट में भी स्थानीय बड़ी इकाइयों या हिंदुस्तान जिंक जैसी इकाइयों को भी पानी की सप्लाई करे तो यह उद्योगों के लिए जलापूर्ति के साथ-साथ परिषद हेतु भी बहुत बड़ा आय का स्त्रोत बन सकता है।
न्यास की जमीनों पर अतिक्रमण एक परेशानी का सबब बनती जा रही है। मेरे विचार से अतिक्रमण शुरू होने के समय ही अगर अतिक्रमण निरोधक दल द्वारा या संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा अगर तत्काल उसको हटा दिया जाता है ,तो अतिक्रमियों को तार फेसिंग, बाउण्ड्री वॉल, मकान निर्माण आदि करने का मौका नहीं मिलेगा और इससे सार्वजनिक हित की भूमियाँ सुरक्षित रहेंगी तथा आमजन को अतिक्रमण से मुक्ति मिलेगी।
भीलवाडा शहर में भी अन्य शहरो के समान बेसहारा गोवंश का सडको पर बेठने की समस्या है चुनाव के परिणाम के बाद से अभी तक 700 गोवंश तो परिषद् द्वारा पकडे जा चुके हैं। और आगे भी पकड़ने के लिए तैयार है पर मुख्य समस्या है। भीलवाडा में अभी केवल एक गों शाला ( काईन हाउस ) स्थित है जिसकी क्षमता भी लगभग 1000 गोवंश की है जिसकी तुलना में अभी हज़ार से अधिक गोवंश रखे गए है। मैं पुरजोर मंत्री महोदय से मांग करता हूँ कि भीलवाडा में एक और गों शाला खोलने की घोषणा की जाये तो सडकों पर बैठे बेसहारा गोवंश की समस्या का समाधान किया जा सकता है।
अतिक्रमण एक बहुत बड़ी समस्या है जो जनहित के विकास को प्रभावित करती है। मेरा आग्रह है कि अतिक्रमी जैसे ही तारबंदी, निर्माण प्रारम्भ करता है, उसे प्रारम्भिक काल में ही अतिक्रमण निरोधक दल व टास्क फोर्स का गठन कर नियंत्रित किया जाए ताकि यह अतिक्रमण की समस्या ही उत्पन्न नहीं हो। इसी के साथ मेरा सरकार से अनुरोध है कि अतिक्रमण जनहित को प्रभावित करता है ऐसे कार्य को तत्काल रोकने के लिए प्रत्येक मुख्यालय पर अतिक्रमण निरोधक दल (टास्क फोर्स) का गठन हो, जो क्षेत्र में हो रहे अतिक्रमण को चिह्नित कर तत्काल उसको रोकने व हटाने की कार्यवाही करे ताकि अतिक्रमण पर अंकुश लग सके।
भीलवाडा शहर में भी अन्य शहरो के समान बेसहारा गोवंश का सडको पर बेठने की समस्या है चुनाव के परिणाम के बाद से अभी तक 700 गोवंश तो परिषद् द्वारा पकडे जा चुके है और आगे भी पकड़ने के लिए तैयार है पर मुख्य समस्या हे भीलवाडा में अभी गौवंश संवर्द्धन एवं संरक्षण हेतु केवल एक गौशाला ( काईन हाउस ) स्थित है जिसकी क्षमता भी लगभग 1000 गोवंश की है जिसकी तुलना में अभी हज़ार से अधिक गोवंश रखे गए है। मैं मंत्री महोदय से पुरजोर मांग करता हॅूँ कि भीलवाडा में एक और गौशाला खोलने की घोषणा की जाये तो सड़कांे पर बैठे बेसहारा गौवंश की समस्या का समाधान किया जा सकता है।
शहर में सीवरेज का कार्य अभी भी चल रहा है जिसकी शहरवासियों द्वारा बहुत शिकायतें आ रही हैं। उसको समय पर निरीक्षण कराते हुए सुव्यवस्थित कराया जाये। वाल्मिकी समाज का स्वच्छ भारत अभियान में बहुत बड़ा योगदान है। हम इनको नमन करते हुए नौकरी हेतु प्रथम स्थान देने की मांग करते हैं। मेरा सभी से आग्रह है कि वाल्मिकी समाज के योगदान को उचित सुविधाएँ व सम्मान मिलना चाहिए।

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