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उत्तम आर्जव धर्म की पूजा में उमडे श्रद्धालु : मन- वचन-काय की कुटिलता का अभाव ही आर्जव धर्म है-मुनि अनुसरण सागर महाराज

उत्तम आर्जव धर्म की पूजा में उमडे श्रद्धालु : मन- वचन-काय की कुटिलता का अभाव ही आर्जव धर्म है-मुनि अनुसरण सागर महाराज

 


सुरीला राजस्थान 

निवाई। सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अग्रवाल मंदिर में मुनि अनुसरण सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में दशलक्षण महापर्व के तृतीय दिवस पर उत्तम आर्जव धर्म की पूजा अर्चना की। जिसमें सैकडों श्रद्धालुओं ने पूजा में भाग लिया। चातुर्मास कमेठी के अध्यक्ष सुनिल भाणजा व विमल जौंला ने बताया कि सुबह भगवान पारसनाथ, भगवान शांतिनाथ व भगवान आदिनाथ का अभिषेक व पंचामृत अभिषेक क्षीर सागर के जल से किया गया। इसके पश्चात सोधर्म इन्द्र राजूलाल, पदमचन्द सेदरिया परिवार ने भगवान पाश्र्वनाथ की शांतिधारा की। इसके पश्चात पंण्डित सुरेश के. शास्त्री के निर्देशन में भक्तिभाव से देव शास्त्र गुरू, चोबिस तीर्थंकर पूजा, सोलह कारण पूजा, शांतिनाथ पूजा, दशलक्षण धर्म व उत्तम आर्जव धर्म की संगीतमय पूजा में श्रद्धालुओं ने जमकर भक्तिनृत्य किया। दोपहर में मुनि अनुसरणसागर महाराज के सानिध्य में तत्वार्थ सूत्र का वाचन किया गया। उन्होंने कहा कि मन- वचन-काय की कुटिलता का अभाव ही आर्जव धर्म है। उन्होंने कहा कि जिसके मन में कुछ है वचन में कुछ और कार्य में कुछ है वह व्यक्ति दुरात्मा है। किसी के साथ छल-कपट नही करना व धोखा नही देना आर्जव धर्म यही प्रेरणा देता है। सांयकाल में ध्यान एवं मंगल आरती व जैन सखी संगठन द्वारा म्यूजिकल हाउजी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।    

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