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 आरजीएचएस की डोर स्टेप डिलेवरी के प्रति अनुमोदित फार्मा स्टोर उदासीन,

आरजीएचएस की डोर स्टेप डिलेवरी के प्रति अनुमोदित फार्मा स्टोर उदासीन,

प्रतिकूल शर्तों की वजह से बनायीं दूरी,
दुकानदारों के 600 करोड से अधिक के बकाया, भुगतान की पूरजोर मांग
सुरीला राजस्थान 
निवाई | राज्य सरकार ने राज्य के सेवारत व सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत डोर स्टेप डिलीवरी कर्मचारी के घर तक दवा पहुचाना की घोषणा की थी। घोषणा की शर्तों में पोर्टल पर बिल रिजेक्शन के डर से अधिकतर केमिस्ट योजना को लेकर आगे नहीं बढ रहे है। आरजीएचएस अधिकृत दवा विक्रेता समिति के प्रदेश अध्यक्ष विवेक विजयवर्गीय ने बताया कि डीएसडी योजना में कठिन शर्तें होने के कारण दवा व्यापारियों को सरकार से पैसे डूबने का डर है। पूर्व में आरजीएचएस में जुडने के लिए दुकानदार को 1 लाख रुपए की बैंक गारंटी जमा करवानी पडी थी। उन्होंने बताया कि होम डिलीवरी की सेवा योजना में जुडने के लिए दुकानदारों से फिर से 1 लाख रुपए की बैंक गारंटी मांगी जा रही है।  जबकि केमिस्टों के 600 करोड रुपए आरजीएचएस में पहले से ही अटके हैं। राजस्थान भर में सरकार से 2 अरब से ज्यादा रुपए भुगतान नहीं हुए। डीएसडी मे पोर्टल पर  पर्ची स्वीकृत होने के बाद दुकानदार उसे रिजेक्ट नहीं कर सकते है और न ही वैकल्पिक दवा दे सकते हैं। इसमें एक कठिनाई यह भी है कि चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवा पर्ची में जिस ब्रांड की दवा लिखी है उसी ब्रांड की दवा दुकानदार को देनी होगी। प्रदेशाध्यक्ष विजयवर्गीय ने बताया कि ढाई सालों से रिजेक्शन और डिडक्शन के बिलों का जान बूझकर निस्तारण नहीं किया जा रहा है। उसमें भी राजस्थान के केमिस्टों के करोड़ो रुपए अटके हुए है। इस वजह से भी केमिस्टों में भारी आक्रोश है। उन्होंने चेतावनी देते हुए बताया कि सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलने वाला और आगामी दिवसों में समस्याओं का त्वरित निस्तारण नहीं किया गया तो लाभार्थियों को दवा मिलने में होने वाली असुविधा के लिए राज्य सरकार स्वयं जिम्मेदार होगी।

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